बागपत। डूडा में बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है, जहां प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना में करोड़पतियों के मकान बनवा दिए गए। जिन्होंने उन मकानों को किराये पर दे दिया और खुद अपने कई मंजिला मकानों में रहते हैं। वहीं जिनको योजना का लाभ दिया गया, उन्होंने मकानों को बेच दिया। गरीबों के मकान ही नहीं बनवाए जा रहे।
प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत गरीबों को लाभ देकर पक्का घर बनवाया जाना था और इस योजना की जिम्मेदारी डूडा को सौंपी गई थी, लेकिन डूडा के अधिकारियों ने इस योजना का लाभ देने में खूब खेल किया है। जिलेभर में 10 हजार से ज्यादा लोगों को योजना का लाभ दिया गया, लेकिन इनमें से 30 प्रतिशत ऐसे लोग हैं, जो करोड़पति, लखपति, सरकारी नौकरी वाले, जमींदार, प्रॉपर्टी डीलर हैं। इनमें से अधिकतर ने मकान बनवाकर किराये पर दे दिए हैं तो मकान पूरा होने के बाद उनको बेच दिया है।
यमुना खादर में मकान बनवाए, एक हजार रुपये किराए पर दिए
डूडा के अधिकारियों ने बड़ा खेल इस तरह से किया है कि पुराना कस्बे में रहने वाले कई लोगों ने यमुना खादर में एक-एक कमरा बनाकर चाहरदीवारी कर दी तो उनको भी ढ़ाई लाख रुपये का लाभ दे दिया गया। जबकि यमुना खादर के जंगलों में इस तरह योजना का लाभ मिल ही नहीं सकता है। इस तरह ही किसी ने शहर से बाहर जंगल में चाहरदीवारी करके गेट लगा दिया तो उसे भी योजना का फायदा दिया गया। इस तरह से बड़ा खेल किया गया है और शहर के बाहर भी मकान बनाने पर सरकार के ढाई-ढाई लाख रुपये लोगों को लुटा दिए। वहीं योजना का लाभ लेने वालों ने अपने मकानों को किराये पर दे दिया है और वह एक-एक हजार रुपये तक वसूल रहे हैं।
डूडा के पूर्व कर्मी समेत कई ने लाभ लेकर बेचा मकान
डूडा में यहां तक खेल हुआ कि वहां के संविदा कर्मियों ने अपने व अपनी पत्नी के नाम पर दो बार लाभ लेकर मकान बना लिया। इसके बाद उस मकान को बेच दिया। इस तरह ही केडीआर स्कूल के पास एक व्यक्ति ने योजना का लाभ लेकर मकान बनाया और उस मकान को बेच दिया। इस तरह के कई मामले है, जिनमें लाभ लेकर मकान बनाकर बेच दिया गया है।
गरीब हो रहे परेशान
बागपत की कश्यप कालोनी की रहने वाली शकुंतला देवी का कहना है कि चार साल से मकान के लिए भटक रहे हैं, क्योंकि पूरा परिवार झोपड़ी में रहता है। इसके बाद भी योजना का लाभ नहीं दिया जा रहा है। यमुना रोड पर रहने वाली श्यामो देवी का कहना है कि पिछले कई साल से डूडा कार्यालय के चक्कर काटकर परेशानी हो चुकी हूं।
किराये पर नहीं दे सकते, न बेच सकते, रिकवरी होगी
डूडा के परियोजना अधिकारी विवेक वर्मा ने कहा कि उनको कुछ दिन पहले ही डूडा की जिम्मेदारी मिली है। नियम के अनुसार योजना का लाभ लेकर न मकान किसी को किराये पर दे सकते हैं और न बेचा जा सकता है। जिन्होंने ऐसा किया हुआ है, उसकी जांच कराई जाएगी और उन सभी से ढाई-ढाई लाख रुपये की रिकवरी की जाएगी।