बागपत। मलकपुर चीनी मिल पर बकाया भुगतान और वर्तमान पेराई सत्र में गन्ने की समस्या के समाधान के लिए कलक्ट्रेट में जुटे किसान प्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच तीन घंटे चली वार्ता बेनतीजा रही। देश खाप के चौधरी सुरेंद्र सिंह ने कहा किसान भुखमरी की कगार पर है। बड़ौत तहसील में सोमवार को पंचायत कर किसान मंथन करेंगे। सरकार किसानों की समस्या सुलझाने में नाकाम रही है।
रविवार को कलक्ट्रेट में डीएम ह्दय शंकर तिवारी, एसपी अजय शंकर राय, सीडीओ जेपी रस्तोगी, एसडीएम बड़ौत दीपाली कौशिक, डीसीओ सुशील कुमार ने किसानों की समस्याएं सुनीं। किसानों की ओर से देश खाप के चौधरी सुरेंद्र सिंह, छपरौली विधायक वीरपाल राठी, गन्ना समिति के चेयरमैन धूम सिंह, विकास परिषद के धर्मेंद्र तोमर समेत अन्य लोगों ने किसानों का पक्ष रखा। दोनों पक्षों में करीब तीन घंटे तक बातचीत चली।
प्रशासन का तर्क था कि पिछले सत्र का कुछ भुगतान किसानों को तुरंत दिलाया जाएगा, जबकि बाकी किश्तों में होगा। जबकि किसानों का कहना था कि वह पाई-पाई को मोहताज हैं। करीब 239 करोड़ रुपये बकाया है, जब तक पूरा बकाया नहीं मिलेगा, चीनी मिल को नहीं चलने दिया जाएगा। देश खाप के चौधरी सुरेंद्र सिंह ने कहा किसानों का पिछले सत्र का भुगतान दिलाएं और वर्तमान में गन्ने के डायवर्जन की व्यवस्था करें।
रालोद विधायक वीरपाल राठी ने कहा किसानों के सब्र का बांध टूटने लगा है। आखिर किसान क्या करें। कहां जाएं, अब किसान कर्जदार हो चुके हैं। ऐसे में कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी प्रशासन की है। धर्मेंद्र तोमर और धूम सिंह ने भी किसानों का पक्ष रखा। यहां काफी देर तक नोकझोंक भी हुई। इस दौरान एलान किया 28 नवंबर को बड़ौत तहसील में पंचायत कर मामले को किसानों के बीच रखेंगे। चौबीसी के चौधरी यहां मौजूद रहेंगे और सभी किसान मिलकर रणनीति तय करेंगे। करीब तीन घंटे चली वार्ता बेनतीजा रही। इसमें जयवीर मलिक, रणवीर सिंह छपरौली, यशपाल सिंह, जयपाल सिंह, मुकेश बरवाला, महिपाल प्रधान मौजूद रहे।
क्या चाहते हैं किसान ःदेश खाप के चौधरी सुरेंद्र सिंह ने कहा किसानों को पिछले सत्र का भुगतान चाहिए। इसके अलावा वर्तमान में खेतों में खड़े गन्ने की व्यवस्था प्रशासन करें। किसानों के सामने गेहूं बुआई का संकट खड़ा होने लगा है। इसकी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। किसान का धन चीनी मिल के पास है। नोट बंदी से और भी अधिक समस्या खड़ी हो गई है। किसान को फिलहाल कोई हल दिखाई नहीं दे रहा है।
जब उलझ गए किसान
वार्ता बेनतीजा रहने के बाद कलक्ट्रेट से बाहर निकले कुछ किसान आपस में ही उलझ गए। बाद में किसान प्रतिनिधियों ने इनका बीच बचाव कराया।
किसान ने कहा, नहीं चाहिए राजनीति ः बातचीत के बीच ही एक किसान ने यहां तक कह दिया यह किसानों की समस्या है। इस पर उन्हें कोई राजनीति नहीं चाहिए। यह तक कह डाला कोई नेता भी इस समस्या के बीच में न आए। बाद में अन्य किसानों ने कहा जो भी किसान की समस्या और उसके दर्द की बात करेगा, वह किसानों के बीच आ सकता है।