बालैनी (बागपत)। रोशनगढ़ गांव कर अंकित मिट्टी से एक से एक डिजाइनर बर्तन बनाकर अपनी विरासत को संजोए हुए है। वह अपने चाक पर मिट्टी से कटोरी से लेकर सुराही, हुक्का, कप और बोतलें बना रहा है। बागपत के अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में उसके इन डिजाइनर बर्तनों की डिमांड है।
रोशनगढ़ गांव निवासी अंकित पुत्र भूरा बताता है कि समय के साथ पुराने बर्तनों की डिमांड कम हो गई थी। पहले लोग घड़ा, करवा, मिट्टी की गुल्लक खरीदते थे, मगर धीरे-धीरे इनके प्रति रुचि कम होने लगी। बाजारों में फैंसी सामान की डिमांड बढ़ने लगी। उसने भी डिजाइनर बर्तन बनाने का काम शुरू किया और मार्केट में बिकने वाले प्लास्टिक, स्टील, सिल्वर के बर्तनों से कम दामों में बेचने शुरू कर दिए। डिजाइनर बर्तनों की डिमांड बढ़ी तो उसकी आमदनी भी बढ़नी शुरू हुई। अब उसे मिट्टी के कप, फैंसी कुल्हड़, तवा, बोतल, पतीली, सुराही सहित दर्जनों प्रकार के बर्तन बनाने में महारत हासिल है। बताता है कि उसे चाक पर बर्तन बनाना विरासत में मिला है और उसने इसी विरासत को ही आजीविका का आधार बना लिया है। वह मिट्टी से गमले, घरों की सजावट के लिए फैंसी आइटम के अलावा घर में प्रयोग में आने वाली कटोरी, पतीली, चाय व दूध के कप, पानी बोतलें, हुक्का बनाकर अपने परिवार का पोषण कर रहा है।
इन जिलो में होती है सप्लाई
बागपत। अंकित ने बताया कि उनके डिजाइनर बर्तनों की डिमांड जिले के अलावा, लोनी, गाजियाबाद, मेरठ, शामली जनपदों में है। फोन पर उन्हें बर्तन तैयार करने के ऑर्डर मिलते है। वह डिमांड के आधार पर आर्डर तैयार कर बर्तनों की सप्लाई करता है।
सेहत के लिए लाभकारी मिट्टी के बर्तन
बागपत। श्री राम प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग संस्थान बड़ौत के संस्थापक प्रदीप कुमार का कहना है कि मिट्टी के बर्तनों में बना खाना और उनका पानी जीवन के लिए अमृत समान होता है। मिट्टी के बर्तन में भोजन बनाते समय वाष्प नहीं निकलती है। अन्य बर्तनों में वाष्प निकलने से पोषक तत्व समाप्त हो जाते है। मिट्टी के बर्तन में बना खाना जल्दी पचता है। साथ ही बीपी, कॉलेस्ट्रोल, कैंसर, एसिड, हार्ट अटैक, लकवा, शुुगर, ब्रेन हेमरेज, कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों से बचाव भी रहता है।
बर्तन का नाम मूल्य
बोलत 50
तवा 50
हुक्का 100
पतीली 100 से 150
कटोरी का सैट 30
कप का सैट 30
गिलास का सैट 60
कटोरी का सैट 60
कुकर 150
कढ़ाई 100