बागपत। माता के तीसरे नवरात्र पर मंदिरों में माता के तीसरे रूप चंदघंटा की पूजा अर्चना हुई। श्रद्धालुओं ने माता की पूजा कर पंचमेवा का भोग लगाया। दोपहर में कीर्तन में माता का गुणगान किया।
बाबा जानकीदास मंदिर, दामोदर दास राधा-कृष्ण ठाकुरद्वारा मंदिर, बागेश्वर मंदिर, पक्का घाट मंदिर, पुराना कस्बे के काली माता मंदिर पर श्रद्धालुओं ने माता की पूजा-अर्चना की। दोपहर में मंदिरों में कीर्तन में माता के भक्तों ने माता का गुणगान किया। रात में नगर की कश्यप कालोनी में माता का जागरण कर रात भर माता का गुणगान किया। जागरण में श्रद्धालुओं ने माता की भेंट पर नृत्य किया। बृहस्पतिवार को मंदिरों में माता के चौथे रूप कुष्मांडा की पूजा होगी।
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भगवान शिव-पार्वती के विवाह की महिमा का वर्णन किया
दाहा। दोघट कस्बे में स्थिति प्राचीन बाड़े वाले शिव मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में तीसरे दिन बुधवार को कथा वाचक पंडित परमानंद भारद्वाज वृंदावन ने भगवान शिव-पार्वती के विवाह की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जो भी महिलाएं मां पार्वती व शिव की पूजा करती हैं, उन पर सदैव भगवान की कृपा बनी रहती है। हिंदू धर्म में श्रावण का महीना बहुत पावन महीना माना जाता है। शिव और पार्वती की पूजा करने से जीवन में सदैव मंगल ही मंगल रहता है। मौके पर पंडित पवन देव शास्त्री, प्रेम पंवार, अरविंद खांड़ा, सुशील कुमार, लाला, हरेंद्र, सतीश शर्मा, टीनू, अमित मौजूद रहे।