खेकड़ा (बागपत)। मुन्ना बजरंगी की पांच साल पहले हुई हत्या के मामले में बृहस्पतिवार को सीबीआई की टीम ने जिला जेल में पहुंचकर जांच की। जहां हत्या के सीन को दोहराया गया तो तत्कालीन जेलर और बंदियों के साथ ही अन्य से पूछताछ की गई। सीबीआई की टीम शुक्रवार को भी जांच के लिए जेल में रहेगी।
बड़ौत के पूर्व विधायक और भाजपा नेता लोकेश दीक्षित से रंगदारी मांगने के मामले में झांसी जेल से माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी को पेशी पर बागपत लाया गया था। उसे आठ जुलाई 2018 को बागपत जेल भेजा गया था। उसकी जेल के अंदर ही नौ जुलाई को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उसको 12 गोलियां मारी गई थीं और उसके शरीर पर चोट के निशान भी मिले थे।
मुन्ना बजरंगी की हत्या का आरोप बागपत जेल में बंद रहे कुख्यात सुनील राठी पर लगा था। पुलिस ने उस समय खुलासा किया था कि सुनील राठी और मुन्ना बजरंगी की जेल में बहस हो गई थी। इसके बाद सुनील राठी ने गोली मारकर उसकी हत्या कर दी थी। मुन्ना बजरंगी पर 40 हत्याओं, लूट, रंगदारी की घटनाओं में शामिल होने के मुकदमे दर्ज थे।
पत्नी की याचिका पर शुरू हुई सीबीआई जांच
मुन्ना बजरंगी की हत्या के मामले में उसकी पत्नी सीमा सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। आरोप लगाया गया था कि जेल प्रशासन ने सुनील राठी से मिलीभगत करके यह हत्या कराई है। इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की गई थी। उसके बाद सीबीआई जांच के आदेश हुए थे। मगर लखनऊ सीबीआई की जांच कई साल बाद भी लटकी रही तो उसके बाद वह जांच दिल्ली सीबीआई को ट्रांसफर की गई थी।
सीबीआई के अधिकारियों ने जेल में पहुंचकर की जांच
खेकड़ा। मुन्ना बजरंगी हत्याकांड को लेकर सीबीआई के कई अधिकारी बृहस्पतिवार दोपहर करीब तीन बजे जिला जेल में पहुंचे। वह सीधे जेल के अंदर चले गए और उसके बाद किसी के जेल के अंदर जाने व बाहर आने पर पाबंदी लगा दी गई।
जेल अधीक्षक विष्णु कांत मिश्रा और जेलर जितेंद्र कश्यप पहले भी मौजूद थे। जेल में घटना के समय तैनात रहे जेलर उदय प्रताप सिंह मौजूद थे। उनसे सीबीआई की टीम ने पूछताछ की तो वहां उस समय के बंदियों व अन्य कर्मियों से पूछताछ की गई।
वहां मुन्ना बजरंगी की हत्या के पूरे घटनाक्रम की जानकारी करके सीन को दोहराया गया। जिससे पूरी स्थिति स्पष्ट हो सके। सीबीआई की टीम शुक्रवार को भी जेल में रहकर जांच करेगी।