बागपत/बड़ौत। किसान आंदोलन व बॉर्डर सील होने की वजह से यहां रिम-धुरा समेत अन्य उद्योग प्रभावित होने शुरू हो गए है। क्योंकि कच्चा माल आने में समस्या हो रही है तो माल तैयार होने पर सप्लाई भी प्रभावित हो रही है। इससे अभी तक चार करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो चुका हैै। बाजार में भी पूरा सामान नहीं आने से व्यापारियों के सामने समस्या आ रही है। इस समस्या का जल्द समाधान कराने की मांग की जा रही है।
- रिम-धुरा फैक्टरी में पंजाब समेत अन्य जगहों से आता है माल
रिम-धुरा बनाने वाली जिले में करीब 90 से अधिक फैक्टरी है। जिनमें तकरीबन पांच हजार से अधिक मजदूर काम करते हैं। किसान आंदोलन व बॉर्डर सील होने की वजह से व्यापार के साथ-साथ मजदूरों के सामने भी संकट खड़ा हो गया है। क्योंकि पंजाब समेत अन्य जगहों से कच्चा माल न आने की वजह से काम नहीं हो रहा है और पहले से मौजूद माल से कुछ सामान तैयार किया गया है तो वह भी सप्लाई नहीं हो रहा है। इस तरह परेशानी हो रही है।
- पत्थर व अन्य सामान भी नहीं आ रहा
बागपत औद्योगिक क्षेत्र में पत्थर, प्लास्टिक आदि के सामान की फैक्टरी है। जिसका माल राजस्थान समेत अन्य जगहों से आता है। लेकिन बॉर्डर बंद होने की वजह से इन फैक्टरी में भी माल आने में परेशानी हो रही है। इसके अलावा बाजार में पंजाब, हिमाचल, जम्मू की तरफ से आने वाले सामान जिनमें सब्जी व फल भी शामिल है, उनकी आपूर्ति में समस्या आ रही है। जिससे हालात जल्द ही सामान्य नहीं हुए तो इनके दाम पर भी असर पड़ सकता है।
- किसान आंदोलन व बॉर्डर सील होने के कारण परेशानी बढ़ने लगी है। क्योंकि कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित होने लगी है और तैयार माल की सप्लाई भी नहीं हो रही है। अगर जल्द ही समस्या का समाधान नहीं हुआ तो परेशानी बढ़ सकती है। सरकार जल्द ही समस्या का समाधान करें। - अश्वनी शर्मा, महासचिव बागपत इंडस्ट्रियल वेल्फेयर एसोसिएशन
- बॉर्डर सील होने से पंजाब से आने वाला माल नहीं आ रहा है। इसके अलावा पहले से तैयार माल की सप्लाई नहीं हो रही है। इससे रोजाना लाखों का नुकसान उद्यमियों को हो रहा है। - ललित जैन, कोषाध्यक्ष इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
- अधिकतर कच्चा माल पंजाब से आता है। माल आने के बाद जो तैयार हो जाता है, वह दिल्ली समेत अन्य प्रदेशों में सप्लाई किया जाता है। लेकिन किसान आंदोलन के कारण सभी बॉर्डर सील है, जिससे फैक्टरी में उत्पादन और सप्लाई प्रभावित हो रही है। इसका पूरा आकलन करें तो अब तक तीन करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो चुका है। सरकार को जल्दी ही किसानों से वार्ता कर समाधान निकलना चाहिए। - डाॅ. योगेश जिंदल, कनवीनर इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन