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धान में भूरा फुदका व गंधी बग कीट का प्रकोप

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बागपत। जिला कृषि रक्षाधिकारी डॉ सूर्य प्रताप सिंह ने बताया कि धान की फसल बालिया निकलने के दौरान फुदका कीट का प्रकोप तेजी से बढ़ता है। कीट पौधे का रस चूसकर उसे सूखा देता है। फसल जगह-जगह से जली हुई सी दिखाई देती है। इस रोग की रोकथाम करने के लिए इमिडाक्लोरप्रिड 17.8 प्रति 300 एमएल प्रति हेक्टेअर, थायोमेथोक्सम 25 प्रति 500 ग्राम प्रति हेक्टेअर, डाईक्लोरोवॉस 76 प्रति 500 एमएल का प्रति हेक्टेअर में छिड़काव करना चाहिए। इसके अलावा गंधी बग कीट फसल की बालियों पर बैठकर दानों का रस चूस लेता है। बाली निकलने के दौरान फसल में यूरिया का प्रकोप बंद कर कीट से फसल के बचाव के लिए मैलाथियान पांच प्रति धूलदार 25 किग्रा प्रति हेक्टेअर की दर से बुरकाव करने अथवा फैनवलरेट .04 प्रति धूलदार 25 किग्रा प्रति हेक्टेअर की दर से बुकराव करने या इमिडाक्लोरप्रिड 17.8 प्रति 300 एमएल प्रति हेक्टेअर 500 से 600 लीटर पानी का घोल बनाकर स्प्रे करने से कीट की रोकथाम की जा सकती है।
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