इस तरह ही जहां अप्रैल से पहले जीएसटी पांच प्रतिशत होती थी, वह 12 प्रतिशत पर पहुंच गई है। जबकि इस बढ़े खर्च के अनुसार ईंटों के दाम नहीं मिल रहे है। इसलिए ही अखिल भारतीय और प्रदेश ईंट निर्माता समिति के आह्वान पर 17 सितंबर तक भट्ठों से ईंटों की बिक्री बंद कर दी गई है। भट्ठा मालिकों की मांग है कि उनको कम दाम में कोयला उपलब्ध कराया जाए और जीएसटी की दर भी पहले की तरह पांच प्रतिशत की जाए।
भवन निर्माण सामग्री सप्लाई करने वालों ने भी हाथ खड़े किए
भट्ठों से ईंटों की बिक्री बंद होने के बाद लोगों ने भवन निर्माण सामग्री की सप्लाई करने वालों से संपर्क शुरू कर दिया। बागपत में दिल्ली रोड पर रहने वाले शहजाद ने बताया कि वह निर्माण कार्य करा रहे हैं, जिसके लिए ईंट खत्म होने पर वह भट्ठे पर गए, लेकिन वहां अभी ईंट देने से इंकार कर दिया। वह सप्लायर के पास पहुंचे तो उसके पास भी केवल पांच हजार ईंट मिलीं। जिनसे दो दिन काम चल सकता है। इस तरह सप्लायरों के पास भी ईंट खत्म हो गई हैं।
5800 रुपये प्रति हजार ईंट के दाम, फिर भी नुकसान
ईंट निर्माता समिति के महामंत्री नीरज नैन बताते हैं कि ईंट के दाम 5800 रुपये प्रति हजार तक हैं, लेकिन इसके बाद भी भट्ठा मालिकों को नुकसान हो रहा है। क्योंकि ईंट बनाने में लागत काफी आ रही है। इसलिए ही मांग की जा रही है कि सरकार कम दाम में कोयला उपलब्ध कराए और जीएसटी दर भी कम करे। उससे भट्ठा मालिकों और आम लोगों सभी को फायदा होगा।