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Baghpat News: ईंट भट्ठा उद्योग... 25 साल पर भारी पड़े 25 दिन

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बागपत के नौरोजपुर गांव ​स्थित भट्टे पर बारिश के दौरान से नष्ट हुई ईंट। संवाद
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बागपत। ईंट भट्ठा उद्योग पर पिछले 25 साल पर मई महीने के 25 दिन भारी पड़ गए। ऐसा पहली बार हुआ कि मई महीने में भट्ठों पर ईंटें नहीं बनी। कच्ची ईंट बनकर सूखती है और बारिश होने से बर्बाद हो जाती है, अभी तक 70-80 करोड़ रुपये का नुकसान हो गया। इससे ईंटों के दाम में 800 रुपये तक की बढ़ोतरी होने से लोगों पर इसका बोझ पड़ना शुरू हो गया।
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बागपत में 403 ईंट भट्ठे पंजीकृत है और यहां के लिए ईंट भट्ठा उद्योग काफी अहम है। यहां के भट्ठों से ईंट दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद में ज्यादा सप्लाई होती है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर भी ईंटों की काफी बिक्री है। ईंट भट्ठों को एक मार्च से 30 जून तक चलाया जाता है और इस बीच ही ईंट तैयार करके पूरे साल का स्टॉक कर लिया जाता है। इनमें मई महीना सबसे अहम माना जाता है और गर्मी में ईंट जल्दी सूखने के साथ ही आग में जल्दी पक जाती हैं। मगर इस बार यह मई का महीना ही भट्ठा मालिकों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहा है। यहां मई में अभी तक पांच बार आंधी और बारिश हो चुकी है। इससे कच्ची ईंटें पूरी तरह बर्बाद हो जाती है। इसलिए मई महीने में ईंटें नहीं बन रही हैं।
ईंट महंगी होने से लोगों की जेब हुई ढीली
आंधी व बारिश में ईंटों के खराब होने से भट्ठा मालिकों को नुकसान हो रहा है तो इसका बोझ लोगों पर पडऩे लगा है। ईंटों के दाम एक सप्ताह पहले तक पांच हजार रुपये प्रति हजार थे जो अब बढ़ाकर 5800 रुपये तक कर दिए गए। ईंट निर्माता समिति के पदाधिकारी आगे स्थिति को देखते हुए इसमें अभी ओर बढ़ोतरी की बात कह रहे हैं।
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ईंटों का स्टॉक नहीं हुआ तो किल्लत होगी
इस बार मौसम में अचानक बदलाव हो रहा है और दिनभर धूप के बाद शाम को आंधी के साथ ही ओलावृष्टि व बारिश होने लगती है। मौसम विभाग का इस बार मानसून भी जल्दी आने का अनुमान है जो जून के बीच में बताया गया है। ऐसे में ईंटों का स्टॉक नहीं हुआ तो ईंटों की किल्लत हो सकती है।

मैं पिछले 25 साल से ईंट भट्ठा चला रहा हूं। इन 25 साल में पहली बार मई के महीने में ऐसा हुआ कि भट्ठों पर ईंट नहीं बन सकी। कच्ची ईंट बनने के बाद सूखती है, तब तक बारिश आने से ईंटें बर्बाद हो जाती है। एक ईंट बनाने पर एक रुपये का खर्च आता है और इस तरह अभी तक मई में 70-80 करोड़ रुपये तक नुकसान हो चुका है। नीरज नैन, ईंट भट्ठा मालिक
भट्ठों पर ईंटें नहीं बन रही हैं और कच्ची ईंटों के बारिश से बर्बाद होने पर नुकसान अलग से हो रहा है। ईंटों का स्टॉक भी काफी कम था और वह भी खत्म होने लगा है। इसलिए सभी ने फैसला लिया कि ईंटों के दाम बढ़ा दिए जाए। इससे नुकसान की कुछ भरपाई होगी। सरकार को भी ईंट भट्ठा उद्योग के लिए मदद की घोषणा करनी चाहिए। विनोद गोयल, कोषाध्यक्ष ईंट निर्माता समिति

बागपत के नौरोजपुर गांव स्थित भट्टे पर बारिश के दौरान से नष्ट हुई ईंट। संवाद

बागपत के नौरोजपुर गांव स्थित भट्टे पर बारिश के दौरान से नष्ट हुई ईंट। संवाद

बागपत के नौरोजपुर गांव स्थित भट्टे पर बारिश के दौरान से नष्ट हुई ईंट। संवाद

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