बागपत में रंगदारी का कारोबार खूब फल-फूल रहा है। इसकी जड़े इतनी गहरी हो गईं हैं कि पुलिस उसके करीब भी नहीं पहुंच पा रही है। इस कारोबार ने व्यापारियों का जीना मुश्किल कर दिया है। नतीजा यह है कि व्यापारी यहां से पलायन कर रहे हैं।
बागपत में रंगदारी वसूलने का ट्रेंड काफी पुराना है। कभी व्यापारी से तो कभी भट्ठे वालों से रंगदारी मांगी जाती है। मगर, पिछले कुछ समय से तो यह धंधा हाईस्पीड से दौड़ रहा है। एक माह के अंदर ही चार व्यापारियों को अपराधियों ने अपने निशाने पर ले लिया है। 6 मार्च को अग्रवाल मंडी टटीरी के लोहा व्यापारी विष्णु मित्तल से राहुल खट्टा के गुरु बताए जाने वाले नोएडा की कासना जेल में बंद सचिन नंदा के नाम से दस लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई थी।
इससे एक दिन पूर्व 5 मार्च को बड़ौत में ट्रैक्टर एजेंसी पर फायरिंग कर उधम सिंह के शूटर मेरठ जेल में बंद मनीष उर्फ अन्ना के नाम से 15 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई थी। पुलिस ने बदमाशों को गिरफ्तार कर दोनों घटनाओं का खुलासा कर दिया था। केस के खुलासे पर व्यापारियों ने पुलिस अफसरों को न केवल बधाई दी थी, बल्कि उन्हें सम्मानित भी किया था।
उन्हें लग रहा था रंगदारी मांगने वाले बदमाश पकड़े गए हैं। अब उन्हें राहत की मिलेगी। मगर, ऐसा कुछ नजर नहीं आया। बदमाशों ने बड़ौत के खल व्यापारी ब्रिजेश से 4 अप्रैल को खत के माध्यम से 30 लाख रुपये की रंगदारी मांगी। इतना ही नही कपड़ा व्यापारी डीके जैन से 25 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई। लगातार मिल रही धमकी से ऐसा प्रतीत होता है कि पुलिस का बदमाशों पर कोई अंकुश नहीं है। इससे व्यापारी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे है।
अपराधियों पर हो रही कार्रवाई : एसपी
एसपी रवि शंकर छवि का कहना है कि व्यापारियों से रंगदारी मांगने वाले लगातार पकड़े जा रहे है। पुलिस द्वारा उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है।