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दुर्लभ प्रजाति के काले हिरन की तालाब के दलदल में फंसकर मौत

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काले हिरन की तालाब के दलदल में फंसकर मौत
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बिनौली (बागपत)। सिरसली गांव में कुत्तों से बचने के प्रयास में एक काले हिरन की तालाब की दलदल में फंसने से मौत हो गई। ग्रामीण और वन विभाग की टीम ने गड्ढा खुदवाकर दबवा दिया है। वन विभाग के अनुसार यह दुर्भल प्रजाति का ब्लैक बग था। क्षेत्र में बहुत ही कम देखने को मिलता है।
बिनौली क्षेत्र के सिरसली गांव में शुक्रवार की की सुबह एक काला हिरन कुत्तों के हमले से बचने के लिए गांव में घुस गया था। जान बचाते हुए गांव में स्थित तालाब में कूद गया। वहां दलदल अधिक होने के कारण फंसा गया। ग्रामीणों को पता चला तो उन्होंने कुत्तों को खदेड़ा। उसके बाद तालाब की दलदल में फंसे काले हिरन को बाहर निकाला। इसकी सूचना वन विभाग के अधिकारी और पशु चिकित्सा विभाग के डॉक्टरों को दी। ग्रामीणों ने काफी देर तक उसके शरीर को सहलाते रहे। डॉक्टरों के आने से पहले ही दम तोड़ दिया। मौके पर पहुंचे वन विभाग की टीम ने इसकी जांच पड़ताल की। ग्रामीणों के साथ मिलकर गहरा गड्ढा खुदवाते हुए को दबवा दिया। वन विभाग की ओर से दरोगा रामोतार शर्मा और वन रक्षक संजीव कुमार पहुंचे थे।
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सबसे अधिक राजस्थान में पाया जाता है काला हिरन
वन क्षेत्राधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि जिले में दुर्लभ प्रजाति के जीव जंतु है। काला हिरन सबसे दुर्लभ प्रजाति का जीव था। यह प्रजाति अधिकांश राजस्थान में पाई जाती है। जिले में इस प्रजाति के हिरन जंगलों में घूमते रहते है। यह जिले के लिए बहुत दुख की बात एक दुर्लभ प्रजाति के हिरन को खो दिया है।
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आवारा कुत्ते बन रहे मौत का कारण
जंगली जीव जंतु के लिए आवारा कुत्ते इनके लिए मौत का कारण बन रहे है। दुर्लभ प्रजाति के जीवों को जंगलों में छीपने की जगह नहीं मिल रही है। जिस कारण गांवों आबादी के बीच तक पहुंच जाते है। वहां आवारा कुत्ते उन्हें के लिए परेशानी बन रहे है।
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