-भाजपा की प्रत्याशी केवल खेकड़ा में जीत सकी, अन्य सभी जगह हार का मुंह देखना पड़ा
-रालोद ने बागपत व बड़ौत पर कब्जा जमाया तो निर्दलीय जीतने वाले भी कई जुड़े हुए
अंकित चौहान
बागपत। निकाय चुनाव के परिणाम से लोकसभा के लिए सबसे ज्यादा चिंता भाजपा की बढ़ी है, क्योंकि भाजपा को कोई फायदा नहीं हो सका। राजनीतिक लिहाज से सबसे अहम जगह बड़ौत से भी उसको हार का मुंह देखना पड़ा। रालोद को जरूर इस बार काफी फायदा हुआ है और उसके लिए लोकसभा को देखते हुए अच्छे संकते है।
निकाय चुनाव में सभी पार्टियों ने अध्यक्ष पद के लिए अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे हुए थे। यहां राजनीति के लिहाज से देखा जाए तो बागपत व बड़ौत सबसे अहम है और इन जगहों पर भाजपा, रालोद, बसपा, कांग्रेस, आप सभी के प्रत्याशी उतरे थे। भाजपा के सांसद, मंत्री, विधायक समेत अन्य ने प्रत्याशियों को जीत दिलाने के लिए पूरा जोर लगाया हुआ था और सड़कों पर घूमकर उनके लिए वोट भी मांगे। इसका एक बड़ा कारण यह था कि सभी नेताओं की नजर निकाय के साथ ही लोकसभा चुनाव पर टिकी थी। अगले साल लोकसभा चुनाव होने हैं और इन निकाय चुनाव से लोकसभा की नींव तैयार की जा रही थी, क्योंकि इस चुनाव से यह साफ था कि जिस पार्टी के प्रत्याशी को जीत मिलेगी, वह उस पार्टी के लिए लोकसभा को देखते हुए सुखद होगा।
-रालोद को दो तो भाजपा को एक जगह मिली जीत
यहां तीन नगर पालिका बागपत, बड़ौत, खेकड़ा और छह नगर पंचायत अमीनगर सराय, रटौल, अग्रवाल मंडी टटीरी, दोघट, टीकरी, छपरौली हैं। इनमें से रालोद को बागपत व बड़ौत पर जीत मिली तो भाजपा को केवल खेकड़ा मिल सकी। वहीं भाजपा ने छपरौली को छोड़कर अन्य सभी जगह अपने प्रत्याशी उतारे हुए थे और रालोद ने केवल तीन जगह अपने प्रत्याशी उतारे थे। ऐसे में रालोद को बड़ा फायदा हुआ है और भाजपा को बड़ा नुकसान हुआ।
-एक लाख 69 हजार वोटरों में करीब 51 हजार भाजपा को मिले
यहां तीन नगर पालिका व छह नगर पंचायतों में दो लाख 67 हजार 876 वोटर हैं। इनमें से एक लाख 69 हजार ने वोट डाला था। इसमें करीब 51 हजार वोट भाजपा को मिले हैं। इस तरह इन वोटरों के रूझान से लोकसभा की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।