फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रालोद के गढ़ में भाजपा ने खिलाया कमल

Sat, 30 Dec 2017 12:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
विज्ञापन
बागपत में जीत के बाद भाजपा की रैली में भीड़ का फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
साल 2017 में खूब सियासी उठापटक देखने को मिली। पहले विधानसभा और फिर निकाय चुनाव के नतीजे रालोद के लिए निराशाजनक रहे। बड़ौत और बागपत सीट पर भाजपा के विधायक चुने गए, जबकि रालोद इस बार के चुनाव में भी छपरौली तक ही सिमटा रहा।
विज्ञापन


निकाय चुनाव में बड़ौत में कांटे की टक्कर में पालिका की बाजी भी भाजपा के ही हाथ लगी। रालोद का दुर्ग दरकता नजर आया जबकि भाजपा मजबूत हुई। साल की शुरूआत विधानसभा चुनाव की सरगर्मियों के साथ हुई थी।

खूब सियासी पैंतरेबाजी हुई। टक्कर सीधे रालोद और भाजपा के बीच दिखी। लेकिन बड़ौत में भाजपा के केपी मलिक और बागपत में योगेश धामा ने रालोद को पछाड़कर विधानसभा की राह पकड़ ली। 
विज्ञापन


छपरौली में रालोद के विधायक सहेंद्र सिंह रमाला चुने गए, लेकिन जीत का अंतर बहुत ज्यादा बड़ा नहीं रहा। इस सीट पर भी भाजपा का वोट बैंक बढ़ा। साल की शुरूआत में जहां विधानसभा चुनाव के नतीजे रालोद के लिए निराशाजनक रहे, वहीं साल के आखिर में निकाय चुनाव में फिर बाजी भाजपा के हाथ ही नजर आई।

दोनों पार्टियों के बीच बड़ौत में कांटे की टक्कर हुई। लेकिन भाजपा के प्रत्याशी अमित राणा उर्फ डॉ दुष्यंत तोमर ने रालोद के अश्वनी तोमर को पछाड़कर बाजी मार ली। नतीजों से साफ है कि अपने ही गढ़ में रालोद सिमटता नजर आया, जबकि भाजपा का जादू खूब चला।

सत्यपाल मलिक बनाए गए बिहार के राज्यपाल
बागपत। बिहार के राज्यपाल रहे रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति चुन लिए जाने के बाद जिले के हिस्से में एक और राजनीतिक कामयाबी रही। हिसावदा गांव के रहने वाले और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे सत्यपाल मलिक को बिहार का राज्यपाल बनाया गया।

बसपा सिमटी, सपा फिसली और कांग्रेस खाली
बागपत। साल 2017 में बसपा, सपा और कांग्रेस के हाथ खाली रही। बसपा को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। विधानसभा चुनाव 2012 में बसपा के पास बड़ौत और बागपत सीट थी, लेकिन इस साल इन दोनों सीटों पर भाजपा काबिज हो गई।

बसपा के लिए यह बड़ा झटका रहा। सपा ने छपरौली, बड़ौत में प्रत्याशी उतारे, जबकि बागपत में कांग्रेस के साथ गठबंधन के प्रत्याशी ने चुनाव लड़ा। लेकिन कहीं भी बाजी हाथ नहीं लगी। कांग्रेस के लिए भी साल 2017 कोई बड़ी उपलब्धि लेकर नहीं आया। निकाय चुनाव में भी सपा, बसपा कांग्रेस के हाथ भी सफलता नहीं लगी।

केंद्रीय मंत्री बने सत्यपाल सिंह
बागपत। बागपत सांसद डॉ सत्यपाल सिंह को इसी साल केंद्रीय मानव संसाधन राज्यमंत्री बनाया गया। लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा का यह बड़ा सियासी कदम रहा। मुजफ्फरनगर के सांसद डॉ संजीव बालियान को हटाकर डॉ सत्यपाल सिंह को नई जिम्मेदारी दी गई।

सियासत में खूब हुई दल-बदल
बागपत। विधानसभा और निकाय चुनाव में खूब दलबदल भी हुई। पूर्व विधायक साहब सिंह, और सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष ठाकुर प्रदीप सिंह ने चुनाव से पहले सपा छोड़कर रालोद का दामन थाम लिया।

साहब सिंह को बड़ौत से प्रत्याशी बनाया गया, लेकिन वह हार गए। प्रदीप ठाकुर को रालोद ने जिलाध्यक्ष बनाया। निकाय चुनाव से एन पहले पूर्व मंत्री नवाब कोकब हमीद के बेटे अहमद हमीद बसपा छोड़कर रालोद में शामिल हुए।

अहमद ने बसपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए। बड़ौत में सलीम भी रालोद छोड़कर बसपा में गए। बसपा से नसीमञुद्दीन सिद्दीकि को निकाले जाने के बाद बसपा से चुनाव लड़ चुकी टीकरी की पूर्व चेयरपर्सन राजबाला चौधरी ने भी बसपा छोड़ दी। वर्ष 2012 में बागपत सीट से विधायक रही हेमलता चौधरी, उनके पति प्रशांत चौधरी भी बसपा छोड़कर रालोद का दामन थाम लिया।
विज्ञापन


साल जाते-जाते आए सीएम योगी आदित्यनाथ
बागपत। साल खत्म होते-होते सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ भी बागपत के रमाला पहुंचे। रमाला चीनी मिल का विस्तारीकरण और कोजन प्लांट का शिलान्यास किया। 
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें