बागपत जनपद पहुंचे आचार्य दीपाकर महाराज ने कहा कि भिक्षा यात्रा का उद्देश्य जातियों में बंटे सनातन को एक करना है। उन्होंने कहा कि जब तक भिक्षा यात्रा है तब तक सरकारों को जातिगत जनगणना के झुनझुना नही बजाने दिया जाएगा। शास्त्रों में वर्णों का वर्णन है, जाति का नही। कहा कि जनसंख्या नियंत्रण पर काम बीस साल पहले होना चाहिए था।
उत्तर प्रदेश के बड़ौत पहुंचे आचार्य दीपांकर महाराज ने कहा कि जातीय जनगणना सनातन धर्म के पतन का मुख्य कारण है। देश में जातीय जनगणना करने का उद्देश्य सनातन धर्म को खंड खंड करना है। जोकि बर्दास्त नहीं होगा। कहा कि शास्त्रों में वर्णो का वर्णन है नाकि जातियों का।
विज्ञापन
वे रविवार को आवास विकास कालोनी में मनुदेव पूनिया के आवास पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि देश में हिंदुओं को एकजुट होना होगा। हमें जातीय बंधन को तोड़ते हुए केवल हिंदू बनना होगा। अलग-अलग जातियों में रहेंगे तो मुटठी भर रहेंगे।
कहा कि जब स्वामी विवेकानंद सात समंदर पार शिकागो में जाकर गर्व से कहा था कि हम हिंदू हैं, तो फिर हम देश में क्यों नहीं कह सकते। जो भी सरकार देश में जातीय जनगणना कराएगी वह हिंदू धर्म की विरोधी होगी।
उन्होंने बताया कि वह भिक्षा यात्रा के द्वारा जातीय बंधन को समाप्त कर, हिंदू धर्म को एक करने का संकल्प लेकर निकले हैं। वे भिक्षा यात्रा को पूरे देश में जारी रखेंगे। कहा कि जनसंख्या नियंत्रण पर सरकार को काम करने की जरूरत है। यह काम बीस साल पहले हो जाना चाहिए था।