बागपत। उपचार के अभाव में टीबी से ग्रस्त मरीज मंगलवार को कलक्ट्रेट के पास हाईवे किनारे घंटों तड़पता रहा। जिला अस्पताल के चिकित्सक ने रेफर कर अपना पल्ला झाड़ लिया। वहीं पेट के दर्द से मरीज अस्पताल के बाहर तड़पता रहा। इससे क्षुब्ध होकर लोगों ने हंगामा किया।
बड़ौत के गांव वाजिदपुर निवासी महिला कविता का कहना है कि उसका पति रघुनाथ, टीबी से ग्रस्त है। हालत बिगड़ने पर मंगलवार सुबह अपने दस वर्षीय बेटे गौरव के साथ अपने पति को लेकर जिला अस्पताल पहुंची। चिकित्सकों ने उसके पति को देखते ही रेफर किया। डॉक्टर से पति को भर्ती करने के लिए काफी आग्रह किया, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं की। न ही वहां पर एंबुलेंस मिली। वह अपने पति को लेकर कलक्ट्रेट के पास बस स्टैंड पर पहुंची। वह अपने पति को मेरठ या दिल्ली ले जाने की स्थिति में नहीं है। इसी कारण वहां पर मरीज तड़पता रहा। वहां लोग इकट्ठे हो गए। उन्होंने हंगामा किया। उसे दोबारा जिला अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया।
रघुनाथ को देखकर युवाओं का दिल पसीजा
बागपत। कलक्ट्रेट के पास जमीन पर लेटे मरीज रघुनाथ को देखकर कई युवाओं का दिल पसीज गया। बिहारीपुर गांव के निशांत और प्रशांत, रघुनाथ को ई-रिक्शा से अस्पताल लेकर पहुंचे। बाद में उसे गोद में उठाकर अस्पताल के कक्ष में ले गए।
दर्द के मरीज को बोला,
आठ तारीख को होगा अल्ट्रासाउंड
बागपत। मुजफ्फरनगर के सौरम गोयला गांव का विकास अस्पताल के इमरजेंसी गेट के स्लैप पर लेटा था और वह पेट दर्द से बुरी तरह से परेशान था। परिजनों का आरोप है कि चिकित्सकों ने उसको भर्ती नहीं किया। इतना ही नहीं अल्ट्रासाउंड आठ फरवरी को करने के लिए बोल दिया। इससे वे परेशान हैं।
करोड़ों खर्च, सुविधा नाम की चीज नहीं
बागपत। मरीजों को बेहतर उपचार और सुविधा मिले। इसके लिए केंद्र और प्रदेश सरकार प्रतिवर्ष जनपद में करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन यहां पर सुविधा नाम की कोई चीज नहीं है। मामूली बीमारी में चिकित्सक मरीजों को रेफर कर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। इसके कारण मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
अस्पताल में मरीजों को मिला उपचार : सीएमएस
सीएमएस डॉ. बीएल कुशवाहा ने कहा अस्पताल में आए सभी मरीजों का उपचार किया गया है। इस तरह की उनके सामने कोई शिकायत नहीं आई है।