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सत्य आत्मा का सौंदर्य : शास्त्री

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संवाद न्यूज एजेंसी
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बिनौली। बरनावा के श्री चंद्र प्रभु दिगंबर जैन मंदिर में पर्युषण पर्व माघ माह के उपलक्ष्य में चल रहे दशलक्षण पर्व के पांचवे दिन श्रद्धालुओं ने उत्तम सत्य धर्म को अंगीकार किया। असत्य रूपी धूप को हवन में समर्पित कर दस श्रीफलों के साथ भगवान चंद्रप्रभु की पूजा अर्चना की।
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पंडित प्रदीप पीयूष शास्त्री ने कहा कि ऋण का थोड़ा, घाव का छोटा, आग को तनिक और कषाय को अल्प मान कर बैठ जाना एक बहुत बड़ी भूल है। जो मोह मुक्त होकर सत्य को अंगीकार करते हैं, उनका आत्मा से मिलन होता है, क्योंकि सत्य आत्मा का सौंदर्य है। असत्य तो कागज की नौका के समान है जो बड़ी मोहक एवं आकर्षक दिखाई पड़ती है जो कभी भी जीवन को पार नहीं करा सकती। क्रोध ,मान, माया लोभ से रहित एवं प्रवंचना के अभाव में जीवन जीना ही सत्य है। जिसने एक बार सत्य को पा लिया, वास्तव में उसके लिए मोक्ष के द्वार खुल जाते है। पूजा में सरिता जैन, राकेश जैन, लोकेश जैन, राजेंद्र जैन, सीता जैन, पायल जैन आदि उपस्थित रहे।
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