यूनाईटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर क्षेत्र के बैंकों में हड़ताल रही और सभी बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में नगर में जुलूस निकाला और सिंडिकेट बैंक की मुख्य शाखा पर प्रदर्शन किया।
सभी बैंकों के मुख्य द्वारों पर हड़ताल के कारण तालें लटके रहे। सभी कर्मचारी और अधिकारियों ने नगर में जुलूस निकाला और सिंडीकेट की मुख्य शाखा पर प्रदर्शन किया। यूनाईटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के अध्यक्ष विक्रम सिंह आर्य ने बताया कि पिछले पांच वर्षों से बैंकों में 20 हजार नई शाखाएं खुली है जबकि बैंकों में शाखाओं के अनुसार कर्मचारी कम है।
बैंकों में वर्क लोड कई गुना बढ़ा है। स्टाफ की कमी के कारण ग्राहकों को भी असुविधाएं हो रही है और बैंक कर्मियों को भी रोजगार वृद्धि नहीं हो रही है और देश की आर्थिक विकास दर भी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि बैंकों का 3.64 लाख करोड़ रुपया एनपीए के रूप में फंसा हुआ है। इसमें से करीब एक लाख करोड़ रुपया बिल्कुल डिफाल्टर के पास है। इसकी अविलंब वसूली होनी चाहिए।
यदि इस धन की वसूली हो जाती है तो बैंकों को अपने परिचालन के लिए सरकार के धन की कोई आवश्यकता नहीं होगी। सरकारी बैंकों की जो स्थिति खराब बताई जा रही है वह एनपीए के कारण है। विजय वर्मा ने मांग की कि श्रम बैंकिंग सुधारों के नाम पर जो कर्मचारी विरोधी नीतियां चलाई जा रही है उन्हें तत्काल बंद किया जाये।
अन्यथा बैंक कर्मी संघर्ष जारी रखेंगे। नरेंद्र कुमार, आनंद कुमार, सोनी, टीके ठाकुर, जाढ़ोराम, सचिन, भूपेंद्र, सचिन, अशेाक कुमार, अभिषेक, विजय वर्मा, मुकेश यादव, सुधीर भारती, जगपाल आदि मौजूद रहे।
हड़ताल के चलते बैंक शाखाएं बंद
बागपत/खेकड़ा। बैंककर्मियों की हड़ताल के चलते शाखाएं बंद रही। जिससे लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। लेनदेन ठप रहने के कारण खाता धारकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। शुक्रवार को विभिन्न मांगो के चलते नगर क्षेत्र की बैंक शाखाओं में हड़ताल के आह्वान पर ताले लटके रहे। बैंक शाखाएं हड़ताल के कारण बंद रहने पर खाता धारक मायूस होकर लौट गए।
अधिकांश खाता धारकों को बैंकों की हड़ताल का पता नही था और लेन देन नहीं होने के कारण उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। उधर, बागपत में विभिन्न बैंकों की शाखाएं बंद रही। आम लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा।