बाहुबलियों ने भी जिले में भरी सियासी उड़ान
राजपाल नाई से लेकर मदन भैया तक ने लड़ा चुनाव
अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। जिन नामों की गूंज अपराध की दुनिया में खूब हुई, उन्होंने जिले में सियासी जमीन तलाशने की कोशिश की। छपरौली से बसपा के टिकट पर राजपाल नाई ने चुनाव लड़ा। खेकड़ा विधानसभा सीट पर एक दौर में मदन भैया का कब्जा रहा।
छपरौली विधानसभा सीट से कुख्यात राजपाल नाई ने चुनाव लड़ा था, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। बुलंदशहर के डिबाई के रहने वाले गुड्डू पंडित ने बसपा के टिकट पर बागपत लोकसभा से अपने भाई मुकेश पंडित को चुनाव मैदान में उतारा। साल 2009 में मुकेश पंडित ने यह चुनाव लड़ा, लेकिन रालोद अध्यक्ष अजित सिंह ने उन्हें हरा दिया था। विधानसभा के परिसीमन से पहले खेकड़ा विधानसभा सीट पर मदन भैया काबिज रहे। पहले निर्दलीय और फिर रालोद के टिकट पर चुनाव लड़े और जीते। परिसीमन के बाद सीट का गणित बदल गया। बागपत नई सीट बन गई। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा के टिकट पर कुख्यात सुनील राठी की मां राजबाला चौधरी ने छपरौली विधानसभा से चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली।
जिला पंचायत में भी बाहुबल
जिला पंचायत चुनाव में भी बाहुबल का खूब असर दिखता रहा है। कुख्यात परमवीर तुगाना जिला पंचायत चुनाव की तैयारी कर रहा था। परमवीर की हत्या कर दी गई। रमाला थाना क्षेत्र के किरठल गांव के धर्मेंद्र की मां जिला पंचायत सदस्य हैं। सपा ने उन्हें अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने के लिए भी टिकट दे दिया था।