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Baghpat: 170 तोतों के साथ पकड़े तीन शिकारी, बोलने वाला बताकर बेचते थे ऊंचे दामों पर, कई की हालत खराब

Mon, 06 Apr 2026 07:59 PM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, बागपत

सार

कन्नौज के शिकारियों के गिरोह को बागपत में चेकिंग के दौरान पकड़ लिया गया। अलेक्जेंड्राइन नस्ल के ये तोते राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के जंगल से पकड़े गए थे। इनको गाजियाबाद के लोनी में सप्लाई किया जाना था। 
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तोतों के साथ पकड़े गए तीन शिकारी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे पर मवीकलां टोल के पास वन विभाग और पुलिस  ने 170 तोतों के साथ अंतरराज्यीय गिरोह के तीन शिकारियों को गिरफ्तार कर लिया। उनकी कार में आठ पेटियों में अलेक्जेंड्राइन नस्ल के तोते मिले। दो आरोपी फरार हो गए। पीपल फॉर एनिमल्स संस्था के प्रभारी गौरव गुप्ता ने बागपत कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई है।
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पीपल फॉर एनिमल्स संस्था के प्रभारी गौरव गुप्ता ने बताया कि राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के जंगल से तोते पकड़कर लोनी जिला गाजियाबाद और दिल्ली में तस्करी किए जाने की सूचना मिली थी। इस पर सोमवार सुबह वन विभाग और बागपत कोतवाली पुलिस की टीम के साथ संयुक्त अभियान चलाया गया। 
 

दिल्ली-सहारनपुर नेशनल हाईवे पर पेरीफेरल एक्सप्रेसवे के मवीकलां टोल से नीचे उतर रही गाड़ी को चेकिंग के लिए रोकने का प्रयास किया तो चालक ने गाड़ी भगाने का प्रयास किया। घेराबंदी कर कार में सवार खुर्शीद निवासी बगियाफजल, राज व मोहसिन निवासी जेल किला जिला कन्नौज को गिरफ्तार कर लिया, जबकि उनके साथी सौराब निवासी लोनी और शमीम निवासी गोकुलपुरी दिल्ली भाग गए। 
 

गौरव गुप्ता ने बताया कि बरामद किए गए तोते दिल्ली और लोनी में बेचे जाने थे। पकड़े गए आरोपी कन्नौज के रहने वाले शिकारियों के गिरोह के सदस्य हैं, जो बाज, उल्लू समेत अन्य वन्य जीवों का शिकार करके बेचते हैं। सौराब और शमीम के खिलाफ पहले भी कई मामले दर्ज हो चुके हैं।
 
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बोलने वाला तोता बताकर बेचते हैं
संस्था के प्रभारी गौरव ने बताया कि शिकारियों के पास मिले तोते काफी छोटे हैं, जिनमें अधिकांश एक महीने के आसपास के हैं। बाजार में इन तोतों को बोलने वाला बताकर 15-20 हजार रुपये में बेचा जाता है। अभी कई तोतों की हालत खराब है, उनके उड़ने लायक होने के बाद जंगल में छोड़ दिया जाएगा। इसके अलावा दीपावली पर्व के आसपास बलि देने के लिए बड़ी संख्या में उल्लू की तस्करी करते हैं। उस समय दो-दो लाख रुपये में उल्लू बेचे जाते हैं।

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