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Baghpat: सरोरा की मोहब्बत के ‘दरिया’ में बह गया झगड़ों का ‘सैलाब’

सार

सरोरा एक ऐसा गांव है, जहां 20 साल से कोई लड़ाई झगड़ा थाने नहीं पहुंचा है। यहां बुजुर्ग ही बैठकर हर मसला सुलझा लेते हैं। 
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सरोरा गांव। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जहां गांवों में मामूली विवाद में बड़ी घटनाएं हो रही हैं और थानों तक पहुंच रही हैं। ऐसे दौर में बागपत का सरोरा गांव सभी के लिए भाईचारे का बड़ा उदाहरण है। यह इस बात से पता चलता है कि दो दशक से गांव में कोई बड़ी आपराधिक घटना नहीं हुई। अगर कोई मामूली विवाद हुआ तो बुजुर्गों के फैसले से दिलों के फासले दूर हो गए।
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सरोरा गांव में एक ट्यूबवेल में मस्ती करते बच्चे। - फोटो : अमर उजाला
दोघट थाने के सरोरा गांव की आबादी करीब 1550 है। ठाकुर, पाल, ब्राह्मण की मिश्रित आबादी वाला यह गांव मुजफ्फरनगर व मेरठ की सीमा के पास है। गांव में दो मंदिर हैं और एक प्राथमिक व एक उच्च प्राथमिक विद्यालय है। गांव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि दो दशक से गांव का कोई विवाद थाने तक नहीं पहुंचा है। कहासुनी व कोई सामान्य मारपीट से लेकर अन्य विवाद भी हुआ तो वह गांव के बुजुर्ग सुलझा लेते हैं। इसलिए पुलिस अफसरों की नजरों में यह गांव एक आदर्श गांव बन गया है।
 

सरोरा गांव की साफ सुथरी गलियां। - फोटो : अमर उजाला
23 साल पहले झगड़े में व्यक्ति की मौत के बाद लिया था सबक
सरोरा गांव में करीब 23 साल पहले दो पक्षों के बीच झगड़ा हो गया था, जिसमें एक पक्ष से प्रमोद नाम के व्यक्ति की मौत हो गई थी। इससे पूरे गांव में मातम छा गया था। पुलिस की कार्रवाई के दौरान भी लोगों को परेशानियां झेलनी पड़ी थीं। इसके बाद लोगों ने सबक ले लिया। गांव के बुजुर्गों ने एक जगह बैठककर भविष्य में किसी तरह का झगड़ा व विवाद न करने की अपील की थी। इसका नतीजा यह है कि उसके बाद कोई बड़ा विवाद नहीं हुआ।
 

गांव का उच्च प्राथमिक विद्यालय। - फोटो : अमर उजाला
ये बोले
- गांव में बीस साल से कोई विवाद या अपराधिक घटना नहीं हुई है। गांव में मिश्रित आबादी है और सभी एक साथ मिलकर रहते हैं। कोई मनमुटाव होता है तो उसे बैठकर दूर कर लेते हैं। अभी तक कोई मामला थाने नहीं पहुंचा है। -राजीव कुमार प्रधान

- हमारा गांव आपसी भाईचारे का प्रतीक है। यदि किसी के साथ कहासुनी या अन्य कोई झगड़ा हो जाता है तो सूचना मिलते ही गांव के लोग दोनों पक्षों के लोगों के घर पहुंचते हैं। जहां उनका मनमुटाव दूर कराने का काम करते हैं, जिससे कोई बड़ा विवाद नहीं हो। -सुनीता, बीडीसी

- मेरी उम्र 60 साल से ज्यादा हो चुकी है। एक बार झगड़े में एक व्यक्ति की जान चली गई थी। इससे पूरे गांव के लोग दुखी हो गए थे। तब से आज तक कोई बड़ा विवाद या आपराधिक घटना नहीं हुई। गांव के बुजुर्गों ने हमेशा छोटे विवाद को गांव के अंदर ही शांत करा दिया। -अजब सिंह, ग्रामीण

 
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सरोरा से सबक लें: सीओ
- सरोरा गांव से पिछले कई सालों से कोई बड़ा विवाद थाने में नहीं पहुंचा है। इस गांव में यह अच्छी बात है कि विवाद गांव के लोग आपस में सुलझा लेते हैं और बाद में भी प्रेम भावना से रहते हैं। क्योंकि झगड़े होने के बाद दोनों ही पक्षों के लोगों को परेशानियों झेलनी पड़ती हैं। अन्य गांव के लोगों को भी सरोरा से सीख लेनी चाहिए और आपसी भाईचारा रखना चाहिए। -विजय चौधरी, सीओ बड़ौत


 
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