सरूरपुरकलां गांव में विकास कार्यों में घपले की जांच में पाया गया कि सफाई के नाम पर 32 लाख रुपये खाते से निकाले गए। इसमें सचिव उपदेश को निलंबित कर दिया गया। वहीं, बसौद गांव में सड़क निर्माण से पहले ही पांच लाख रुपये खाते से निकाल लिए गए थे। इसकी रिपोर्ट डीएम को भेजी गई, लेकिन सचिव कुबेर खोखर को निलंबित करने के बजाय पिलाना ब्लॉक से संबद्ध कर दिया गया।
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इसी तरह, निरपुड़ा गांव में पेंशनधारक बुजुर्ग महिला कमलेश को सचिव मोहित उज्ज्वल ने कागजों में मृत दिखा दिया। इसकी शिकायत पर जांच हुई और सचिव को निलंबित कर दिया गया। जबकि ट्योढ़ी गांव में सचिव संदीप ने बुजुर्ग प्रकाश चंद को मृतक दिखाकर उनकी पेंशन बंद कर दी थी, लेकिन यहां केवल चेतावनी देकर सचिव को बचा लिया गया।
सिसाना गांव में भी सचिव सूरज ने बुजुर्ग महिला ओमकारी को मृत दिखाया हुआ है। इस मामले में भी केवल खानापूर्ति करते हुए चेतावनी देकर कार्रवाई पूरी कर दी गई। इन मामलों के बाद अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं कि आखिर एक जैसे अपराध पर अलग-अलग फैसले क्यों लिए जा रहे हैं।