उनका पार्थिव शरीर रविवार शाम को बीएसएफ के जवान गांव में लेकर पहुंचे। बीएसएफ के अफसरों ने रामकुमार के आत्महत्या करने की बात कही तो परिजनों ने हत्या की आशंका जताते हुए दो घंटे तक शव नहीं लिया। अफसरों के जांच कराने की बात कहने के बाद परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार किया।
किशनपुर बराल गांव के रहने वाले रामकुमार बीएसएफ की 89वीं बटालियन में जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के तंगधार में एनआईटीआई पोस्ट पर एएसआई पद पर तैनात थे। बताया गया कि शनिवार रात एएसआई रामकुमार के कमरे से गोलियां चलने की आवाज आई। इस पर साथी जवान वहां पहुंचे तो एएसआई रामकुमार का खून से लथपथ शव जमीन पर पड़ा था और उसके पास एलएमजी पड़ी मिली। बताया कि रामकुमार की गर्दन में पांच गोलियां लगी हैं।
बीएसएफ के अफसरों ने रामकुमार के परिजनों को फोन कर उनके आत्महत्या करने की जानकारी दी। रविवार शाम करीब साढ़े पांच बजे बीएसएफ के असिस्टेंट कमांडेंट शिवम साथी जवानों के साथ रामकुमार का पार्थिव शरीर लेकर किशनपुर गांव पहुंचे। जहां परिजनों ने पार्थिव शरीर लेने से इंकार कर दिया और रामकुमार की हत्या होने की बात कही। बीएसएफ के अफसर ने परिजनों को समझाने का प्रयास किया। करीब दो घंटे तक वार्ता चली और बीएसएफ के आला अधिकारियों से परिजनों की फोन पर बात कराई गई। अधिकारियों ने कहा कि परिजन यहां आकर शिकायत देते हैं तो उसके आधार पर जांच कराई जाएगी। इसके बाद शव को लिया गया और अंतिम संस्कार किया। मृतक के बेटे कपिल ने मुखाग्नि दी। वहां पहुंचे पूर्व विधायक वीरपाल राठी और परिजनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की। साथ ही परिवार के एक सदस्य को नौकरी और आर्थिक मदद की मांग की। बताया कि रामकुमार 12 फरवरी को छुट्टी खत्म कर ड्यूटी पर गए थे। उनकी चार बेटियां और एक बेटा है। इनमें तीन बेटियों की शादी हो चुकी है।
पांच गोली लगने पर परिजनों ने उठाए सवाल
रामकुमार की गर्दन में तीन और सीने में दो गोलियां लगने पर परिजनों ने सवाल उठाए और हत्या की आशंका जताई। इस पर असिस्टेंट कमांडेंट शिवम ने कहा कि एलएमजी ऐसा हथियार है, जिससे एक सेकेंट में 30 राउंड गोलियां चल सकती हैं।