बड़ौत। बलूचिस्तान आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर यहां से बलूच नेताओं के लौट जाने के करीब आठ दिन बाद स्थानीय खुफिया विभाग सतर्क हो गया है। मंगलवार को शहजाद राय शोध संस्थान के डायरेक्टर अमित राय जैन से खुफिया टीम ने बलूच नेताओं के विषय में जानकारी जुटाई। अंतरराष्ट्रीय मसले पर जैन को भी सतर्कता बरतने के लिए कहा गया। उधर, एसपी पूनम ने खुफिया विभाग से मामले की रिपोर्ट तलब की है।
शोध संस्थान पर आठ दिन पहले बलूच नेता नायला खान के पुत्र मजदक दिलशाद के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल पहुंचा था। कुछ देर यहां रुके बलूच नेताओं ने बिलौचपुरा और तिलपनी के बलूची लोगों को बुलाकर बातचीत की। पाकिस्तान में बलूचियों पर हो रहे हमले के विरोध में यहां के लोगों को एकजुट करना उनका मकसद था।
मंगलवार को खुफिया विभाग अलर्ट हुआ। बड़ौत में अमित राय जैन के घर पहुंचकर बलूची नेताओं की जानकारी जुटाई। कौन-कौन लोग और कहां से आए थे। उनका मकसद क्या था। अमित राय से उनका संपर्क कैसे हुआ और वह वेस्ट यूपी के किस-किस गांव में गए। खुद अमित जैन ने इसकी पुष्टि कर बताया खुफिया विभाग की टीम आई थी। कुछ जानकारियां ली, साथ ही उन्हें भी सतर्क रहने के लिए कहा गया है। क्योंकि मामला भारत-पाकिस्तान से जुड़ा है। दूसरी तरफ एसपी पूनम के अनुसार खुफिया विभाग से बलूच नेताओं के यहां पहुंचने की जानकारी मांगी गई है।
वेस्ट में आतंकी सक्रिय हैं, सतर्क
बड़ौत। बलूचिस्तान आंदोलन के नेताओं के संपर्क में आने के बाद खुफिया विभाग ने अमित राय जैन से जानकारी ली। इस बीच उन्हें कहा वेस्ट यूपी में आतंकी गतिविधियां रही है। मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर का है, इसलिए उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। उधर, अमित राय जैन का कहना है कि उन्हें किसी तरह का खतरा नहीं है। उधर, खुफिया विभाग इस जांच में जुटा है कि वेस्ट यूपी में सक्रिय आतंकी संगठनों में से कोई पाकिस्तान के आतंकी संगठनों के संपर्क में तो नहीं है।
आतंकी गतिविधियों से सुर्खियों में रहा बड़ौत
बड़ौत। कसबे के एक धर्म स्थल से दिल्ली क्राइम ब्रांच की पुलिस ने एक आतंकी को गिरफ्तार किया था। बाद में बड़ौत में कई स्थानों पर हथियार छिपे रहने के लिए खुदाई भी कराई गई। वहीं, टांडा का जुबैर को भी आतंकी गतिविधियों में पकड़ा गया था। जो कश्मीर में मुठभेड़ में मारा गया था।
तिलपनी नहीं पहुंचे बलूच, मदद की तैयारी
अमीनगर सराय। पाकिस्तान में बलूचियों पर होने वाले अत्याचार के विरोध में मंगलवार को तिलपनी गांव में बकरीद पर लोगों की बैठक हुई। प्रधान सना उल्लाह ने कहा हालांकि उनके गांव में बलूच नेता नहीं आए, लेकिन इसके बावजूद उनसे जो हो सकेगा मदद की जाएगी।
हिंदुस्तान के कानून का पालन कर शांति प्रिय तरीके से वह मदद करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मदद की जो पहल की है, वह सराहनीय है। पूर्व प्रधान गुल्फरान ने कहा बलूचिस्तान में पाकिस्तान सेना अत्याचार कर रही है, यह गलत है। इसका विरोध किया जाएगा। इसमें नसीम, हबीबुल्लाह, असलम, नईम, दानिश, साजिद और मौसम मौजूद रहे।
बिलौचपुरा के इरफान को जिम्मेदारी सौंपी
बागपत। बलूच नेताओं की बड़ौत में बिलौचपुरा गांव के इरफान से मुलाकात हुई थी। करीब 10 मिनट की इस मुलाकात में वहां के नेताओं ने मदद मांगी। इरफान ने मंगलवार को बताया उन्हें वेस्ट यूपी के जिलों में रह रहे बलूचियों को एकत्र कर दिल्ली में लाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वह इंसाफ की लड़ाई भारत के कानून के हिसाब से लड़ेंगे। दिल्ली में कब धरना प्रदर्शन करेंगे और कहां यह अभी तय नहीं किया है।