इस बार करवाचौथ पर शुभ संयोग बन रहा है। 13 वर्ष बाद दांपत्य जीवन के कारक बृहस्पति अपनी राशि मीन में विराजमान रहेंगे। जिससें दांपत्य जीवन में खुशहाली आएगी। करवाचौथ पर रात आठ बजकर 16 मिनट पर चंद्रोदय होगा।
बाबा जानकीदास मंदिर के मुख्य पुजारी ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि बृहस्पति को दांपत्य जीवन का कारक माना जाता है। इस बार बृहस्पति अपनी राशि में विद्यमान होने के कारण शुभ फल देंगे। इनके अतिरिक्त करवाचौथ पर शनि अपनी राशि मकर और बुध कन्या राशि में होने के कारण दिव्य योग बन रहा है। सही मुर्हूत में विधि विधान से पूजन व व्रत करने से शुभ फल की प्राप्ति होगी। सनातन धर्म में करवाचौथ का त्योहार सुहागिन महिलाओं का महत्वपूर्ण त्योहार है। इस पर महिलाएं शृंगार कर पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं।
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मान्यता है कि चंद्रमा का पूजन करने से जीवन में सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन सुखमय बनता है। इस दिन महिलाओं को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करने के बाद लाल वस्त्रों का धारण कर भगवान की पूजा कर निर्जला व्रत का संकल्प लेना चाहिए। शाम को चंद्रमा के दर्शन और पूजन के बाद ही कुछ खाना चाहिए। महिलाओं को चंद्रमा से पति की दीर्घायु की कामना कर प्रार्थना करने के बाद अर्घ्य देकर व्रत खोलना चाहिए।
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