बागपत। आखिरकार मंगतराम जैन की मेहनत और अमर उजाला की पहल रंग लाई। दो साल से एडमीशन नहीं होने के कारण घर बैठा अरिहंत जैन अब स्कूूल में पढ़ाई कर सकेगा। डीएम के आदेश पर डीआईओएस कार्यालय की दो सदस्यीय टीम ने स्कूल पहुंचकर छात्र का कक्षा छह में प्रवेश कराया। सोमवार से छात्र स्कूल में नई पारी शुरू करेगा।
बड़ौत के आर्य नगर निवासी मंगतराम जैन के बेटे अरिहंत को वर्ष 2013 में कक्षा पांच की पढ़ाई के बाद लार्ड महावीरा एकेडमी ने टीसी दे दी थी। अभिभावक पिछले दो साल से बच्चे की पसंद के चलते एकेडमी में ही प्रवेश कराने के लिए प्रयासरत थे, लेकिन संस्था ने प्रवेश देने से इंकार कर दिया था।
मंगतराम का आरोप था कि उसे चाय वाला कहकर बच्चे को प्रवेश नहीं दिया। वह बड़ौत में ही चाय पत्ती की दुकान चलाता है, इस कारण उसे बार-बार चाय वाला कहकर पुकारा गया। इसी तरह की लिखित शिकायत डीएम से की। बच्चा पिछले दो साल से घर बैठा था। अभिभावकों के संघर्ष का यह मामला अमर उजाला ने छह मई के अंक में प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया। डीएम ने मामले का संज्ञान लिया।
शुक्रवार को बेसिक शिक्षा विभाग की टीम ने मामले की जांच की। शनिवार को स्कूल के प्रधानाचार्य और अभिभावक डीएम ह्दय शंकर तिवारी के सामने अपना-अपना पक्ष रखने पहुंचे। एडीएम राकेश कुमार मालपाणी ने दो पक्षों की सुनवाई की। इसके बाद दोनों पक्षों को डीआईओएस डॉ. आशुतोष भारद्वाज के पास भेजा।
डीआईओएस ने छात्र के एडमीशन के लिए दो सदस्यीय टीम गठित की। बागपत से टीम बड़ौत में स्कूल में पहुंची और बच्चे को स्कूल बुलाकर एडमीशन की प्रक्रिया पूरी कराई। प्रवेश मिलते ही अभिभावकों की खुशी का ठिकाना नहीं था। अब सोमवार से दो साल बाद अरिहंत जैन दोबारा स्कूल जा सकेगा।
क्या हुआ था दो साल पहले
शैक्षिक सत्र 2013-14 में अरिहंत जैन ने कक्षा पांच उत्तीर्ण की थी। कक्षा छह में प्रवेश की तैयारी के लिए स्कूल पहुंचे मंगतराम जैन को बच्चे की टीसी दे दी गई। जैन ने बताया उसने टीसी के लिए आवेदन नहीं किया था। लार्ड महावीरा एकेडमी प्रबंधन से अनुरोध के बावजूद प्रवेश नहीं दिया। परिजनों ने नए स्कूल में एडमीशन के बावजूद वह स्कूल नहीं गया। बच्चे ने अभिभावकों से कहावह अपने पुराने स्कूल में ही पढ़ना चाहता है।
पिता बोला-‘थैंक्स अमर उजाला’
बच्चे के एडमीशन के बाद मंगतराम जैन ने कहा अमर उजाला की पहल के चलते ही उसके बच्चे को प्रवेश मिल सका है। वह पिछले दो साल से इसके लिए संघर्ष कर रहा था।
बच्चे को पढ़ाएंगे ः प्रधानाचार्य
प्रधानाचार्य विक्रम सिंह दानी ने कहा शनिवार को प्रशासन की टीम ने स्कूल पहुंचकर एडमीशन कराया है। संस्था बच्चे के बेहतर भविष्य के लिए उसे पढ़ाने के लिए तैयार है। अभिभावक को कभी भी चाय वाला जैसे कमेंट नहीं किए। पुरानी बातें खत्म हो चुकी है। अहिरंत के लिए बेहतर शिक्षा का प्रबंध किया जाएगा।
स्मृति ईरानी तक पहुंचा था मामला
प्रवेश नहीं होने के कारण अभिभावकों ने मामले की शिकायत केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी से भी की थी। मंगतराम जैन ने बताया प्रवेश मिल जाने के बाद अब वह अपनी शिकायत वापस ले लेंगे।