बड़ौत। तिलवाड़ा टीला से ताम्रपाषाण काल के पुरावशेषों के मिलने से इतिहास की दृष्टि से फिलहाल इसकी देशभर में चर्चा शुरू हो गई है। यहां पर बुधवार को पुरावशेषों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए खोदाई की गई। संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही यहां पर वरिष्ठ पुरातत्वविदों की टीम पहुंच सकती है।
तिलवाड़ा के टीले पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का मेरठ मंडल पिछले ढाई माह से उत्खनन कार्य करा रहा है। यहां पर तीन ट्रेंच में खोदाई की जा रही है। मगर, अभी तक एक ही ट्रेंच से अहम पुरावशेष सामने आ रहे हैं। यहां पहले मृद भांड, मिट्टी के बर्तन, हडिडयां मिल रहे थे। कुछ दिन पहले ही आला टीले पर तांबे की प्लेट, कलाकृति बनी हुई तांबे की वस्तु मिली हैं।
यह पुरावशेष सिनौली में उत्खनन में मिले पुरावेशषों के समान बताए जा रहे हैं। इस तरह ताम्रपाषाण काल के पुरावशेष मिलने के बाद उनको बाहर निकालने के लिए कार्य किया जा रहा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीक्षण पुरातत्वविद विनोद रावत की देखरेख में फिलहाल आला टीले पर खोदाई का काम किया जा रहा है।