बागपत। विश्व श्रवण दिवस पर जिला अस्पताल में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें नोडल अधिकारी ने बहरेपन के लक्षण और कारण के बारे में जानकारी दी। नोडल अधिकारी डॉ. अजेंद्र मलिक ने कहा कि एंटीबायोटिक और कीमोथेरेपी की दवा का अधिक प्रयोग करने और कान के अंदर गंदगी होने से भी सुनने की क्षमता प्रभावित होती है।
इसके अलावा कान में संक्रमण जैसे मवाद आना, दर्द रहना, दुर्घटना के दौरान सिर या कान में चोट लगना, खसरा, मस्तिष्क बुखार, तेज आवाज में संगीत सुनना, कठिनाई युक्त जन्म, समय से पहले बच्चे का जन्म होना और गर्भावस्था के दौरान होने वाली बीमारी के कारण भी व्यक्ति के सुनने की क्षमता प्रभावित होती है।
उन्होंने बताया कि तेज आवाज दिमाग तक आवाज पहुंचाने वाली कॉक्लिया के सेल्स को नष्ट कर देती है। इसके अलावा उम्र्र के साथ कान की संरचना में बदलाव आने पर भी सुनने की क्षमता कम हो जाती है। कान के अंदर गंदगी होने पर कान की कैनाल बंद हो जाती है और आवाज अंदरूनी कान तक नहीं पहुंच पाती है। कुछ लोगों में अनुवांशिकता के कारण भी सुनने की क्षमता प्रभावित होती है। इस मौके पर सीएमओ डॉ. महावीर सिंह, सीएमएस डॉ. एस के चौधरी, डिप्टी सीएमओ मुकेश कुमार, कान रोग विशेषज्ञ डॉ प्रीति सहित अन्य मौजूद रहे।
दवाई की अधिक डोज भी करती है प्रभावित
एंटीबायोटिक, जेंटामाइसिन, वियाग्रा, कीमोथेरैपी की कुछ दवाएं, एस्पिरिन की अधिक मात्रा, कुछ पेनकिलर्स और एंटी मलेरिया दवाई भी अस्थायी रूप से सुनने की क्षमता को प्रभावित करती है।
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ये बरतें सावधानी
-तेज आवाज से बचें
-परेशानी होने पर चिकित्सक की राय लें
-लोगों को अपनी बात धीरे-धीरे दोहराने के लिए कहें
-कान में तेल या पानी न डालें
-लगातार तेज म्यूजिक ना सुने
-कान साफ करने के लिए इयरबड का प्रयोग ना करें
-चिकित्सक की सलाह के बिना कोई दवा नहीं डालें