बागपत। खेकड़ा के मोहल्ला रामपुर के रहने वाले पैरा एथलीट अंकुर धामा पैर में चोट लगने पर कोच जरूर बन गए, लेकिन एक खिलाड़ी उनके अंदर जिंदा रहा और यही कारण है कि ऑपरेशन के बाद पैर की चोट ठीक होते ही अंकुर ने एशियन पैरा गेम्स में तीन दिन में दो स्वर्ण पदक जीतने का इतिहास रच दिया। पहले अंकुर ने पांच हजार मीटर में स्वर्ण पदक जीता था और अब बुधवार को 1500 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीत लिया।
अंकुर धामा की आंखों में पांच साल की उम्र में होली पर रंग चला गया था, जिससे आंखों की रोशनी चली गई थी। इसके बाद भी अंकुर ने हिम्मत नहीं हारी और खेलों के प्रति रुझान दिखाकर दौड़ना शुरू किया। इसके बाद अंकुर ने देश के लिए कई पदक जीते और उनको वर्ष 2018 में अर्जुन अवार्ड भी मिला। इसके बाद अंकुर के पैर में चोट लग गई और उनका प्रदर्शन खराब होता चला गया, जिससे वह साई के कोच बन गए और दिल्ली में खिलाड़ियों को प्रैक्टिस कराने लगे। मगर अंकुर के अंदर खिलाड़ी हमेशा जिंदा रहा और वह खुद भी प्रैक्टिस करते रहे। पैर की चोट से उबरकर दोबारा खेलने लगे तो पहले एशियन पैरा गेम्स में जगह बनाई और अब देश के लिए दो स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास भी रच डाला।
नौ साल पहले भी जीते थे दो पदक
अंकुर के भाई गौरव धामा ने बताया कि अंकुर ने वर्ष 2014 में एशियन पैरा गेम्स में रजत और कांस्य पदक जीते थे। पैरा ओलंपिक वर्ष 2016 में हिस्सा लिया, लेकिन वहां कामयाबी नहीं मिल सकी। अब एशियन पैरा गेम्स तीन दिन में दो स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच डाला है।