गर्भवती महिला और बच्चों को दिए जाने वाले पोषाहार से पशुओं की सेहत बनाई जा रही है। लालच के चलते पशु पालकों को पोषाहार सस्ते दामों में बेचा जा रहा है। पशुपालक भी पोषाहार की थैलियों को खूब खरीद रहे हैं, तर्क है कि इससे दुधारू पशुओं में दूध बढ़ता है। सवाल है कि बच्चों के लिए आने वाला पोषाहार कैसे पशुपालकों तक पहुंच रहा है?
गर्भवती महिलाओं और बच्चों की सेहत को सुधारने के लिए पोषाहार देने की योजना है। ब्लाक स्तर पर आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषाहार वितरित कराया जाता है। आंगनबाड़ी कार्यकत्री वाहनों में भरकर पोषाहार के बोरों को अपने-अपने केंद्रों पर ले जाकर बच्चों और गर्भवती महिलाओं को वितरित करती है। लेकिन जनपद में इसके उलट पशुपालकों को इसके सप्लाई किए जाने का मामला सामने आया है।
कईं जगह पशुपालक इस पोषाहार को खरीदकर अपने पशुओं को खिला रहे हैं। पशुपालकों का कहना है कि इससे दुधारू पशुओं में दूध बढ़ता है और इसे पशु चाव से खाते हैं। इसलिए पशुपालकों का रूझान इसे खरीदने के लिए अधिक बढ़ा है। एसडीएम बागपत राकेश कुमार सिंह का कहना है कि उन्हें इस तरह की शिकायत नहीं मिली है। लेकिन अगर ऐसा मामला है तो बेहद गंभीर है। पशुओं को पोषाहार खिलाया जा रहा है तो इसकी जांच कराई जाएगी।
पांच सौ रुपये में बिक रहा पोषाहार
पशुपालकों को पोषाहार का बोरा 200 से 500 रुपये मेें मिल रहा है। लोगों का आरोप है कि आंगनबाड़ी कार्यकत्री ही पशुपालकों को पोषाहार बेचती है। पशु पालकों को इसका फायदा पहुंचाया जा रहा है।
पोषाहार से बढ़ता है दूध
पशुपालक ओमबीर, देवेंद्र, शिव कुमार, दिलशाद, इकराम, हरपाल और बिजेंद्र ने बताया कि पोषाहार का स्वाद मीठा होता है। इसलिए पशु इसे चाव से खाते हैे। इसे खाने से पशु दूध भी अधिक देते हैं। खल और चोकर से पोषाहार ज्यादा फायदा पहुंचा रहा है। आंगनबाड़ी व अन्य लोगों से पोषाहार खरीद लेते है। उधर, जय भारत माता जन कल्याण सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष रोजूद्दीन त्यागी ने प्रशासन को इस मामले की जांच करनी चाहिए।