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घरों पर जैन ध्वज फहराकर मनाई अक्षय तृतीया

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बड़ौत। वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया को अक्षय तृतीया के रूप में मनाया जाता है। शुक्रवार को जैन समाज के लोगों ने घर पर ही अक्षय तृतीया मनाई।
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जैन समाज के संजय जैन, हर्षित जैन, नवीन जैन बब्बल, आशीष जैन ने बताया कि जैन धर्म में अक्षय तृतीया का विशेष महत्व है। जैन धर्म में मान्यता है कि प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ जिन्हें ऋषभ देव के नाम से भी जाना जाता है । उन्होंने छह माह तक बगैर भोजन पानी के तपस्या की थी। इसके बाद वे आहार के लिए बाहर बैठ गए। ऋषभ देव को राजा समझ कर लोगों ने सोना चांदी का दान दिया, लेकिन आहार नहीं दिया। वह बगैर आहार के फिर से तपस्या में चले गए। एक साल 39 दिन बाद जब आदिनाथ पुन: तपस्या से बाहर आए तो राजा श्रेयांश ने उनके मन की बात समझी और उन्हें गन्ने के रस का पान करा कर उनका उपवास तुड़वाया। इस दिन अक्षय तृतीया थी तभी से जैन समुदाय में अक्षय तृतीया का महत्व है। इस दिन जैन समाज के लोग अपना उपवास गन्ने के रस से खोलते हैं।
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