बागपत। उत्तर प्रदेश में चुनाव का बिगल बज चुका हैं। राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों ने ताल ठोंकनी शुरू कर दी है।
बागपत को जिला बने बीस साल बीत गए, लेकिन अब तक जिला मुख्यालय तक की सूरत नहीं बदली। बागपत विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो यह देश की राजधानी दिल्ली और हरियाणा के सोनीपत से सटा एरिया है। वर्तमान समय में राजनेताओं के पास विकास भी सबसे बड़ा मुद्दा होने की उम्मीद है।
यूपीएसआईडीसी क्षेत्र के लिए जगह आरक्षित है, लेकिन जिले में अपराध की हालत ऐसी है कि उद्यमियों को हिम्मत जुटाना मुश्किल हो जाता है। इसलिए इसमें उद्यमियों को कोई दिलचस्पी नहीं है। इस मुद्दे पर भी उम्मीदवारों को गंभीर होना पड़ेगा।
क्षेत्र में आधारभूत ढांचे की हालत भी बेहद खराब है। जिला मुख्यालय या बागपत विधानसभा क्षेत्र में एक रोडवेज बस स्टैंड तक नहीं है। मेरठ और दिल्ली जाने वाली बसें मुख्य रास्तों पर ही खड़ी होकर सवारियां बैठाती हैं। बार-बार बस स्टैंड की मांग की जा चुकी है, पर अब तक इसका समाधान नहीं हुआ।
पिछले चुनाव में भी प्रत्याशियों ने जिला मुख्यालय पर विकास कराने और बस स्टैंड दिलाने की बात कही थी, वायदा पूरा नहीं हुआ। बढ़ते अपराध और आधारभूत ढांचे की हालत चुनावी मुद्दा बन सकते हैं।