बागपत। चारों तरफ भगदड़ मची हुई थी, निशा वहां असर की नमाज पढ़ रही थी, इस भगदड़ में निशा के गले पर पैर रखकर कई लोग निकल गए। निशा की चीख निकली तो किसी तरह से उसे बचाकर लाया गया। उसका इलाज कराया गया। दहशत इतनी अधिक हो गई कि दूसरे दिन दोपहर तक कोई अपने कमरे से बाहर नहीं निकला।
बागपत के ईदगाह मोहल्ले से हज पर गए हाजी शरीफ के बेटे रईसुद्दीन ने फोन पर अपने परिजनों को बताया तो परिजनों के होश उड़ गए। मक्का में हादसे की खबर सुनते ही परिजन घबरा गए और फोन मिलाते रहे। बागपत से हाजी शरीफ का बड़ा बेटा रईसुद्दीन अपनी पत्नी निशा के साथ हज के लिए गए हुए हैं।
हाजी शरीफ के दूसरे बेटे यामीन ने बताया कि उनके एक मित्र दिलशाद सऊदी में रहते हैं। उन्होंने रात लगभग 11 बजे हादसे की सूचना दी। उस समय सभी लोग सो रहे थे। हादसे की बात सुनते ही परिवार में दहशत फैल गई। उन्होंने रईसुद्दीन को फोन मिलाने का काफी प्रयास किया, लेकिन लगभग एक घंटे तक फोन नहीं मिल पाया, जिससे घबराहट और बढ़ गई। लगभग 12 बजे रहीसुद्दीन से मक्का से ही बात हुई।
जब उसने बताया कि घटना के समय वह मौके पर ही थे और असर की नमाज पढ़ रहे थे। उस समय निशा भी वहीं नमाज पढ़ रही थी। अचानक भगदड़ मच गई, इस भगदड़ में निशा फंस गई और कई लोग उसकी गर्दन पर पैर रखकर निकल गए। जिससे उसकी चीख निकल पड़ी। किसी प्रकार उसे निकालकर लाए। उसके बाद वह सीधे होटल के कमरे में चले गए और फिर वहां से नहीं निकले। मगरिब की नमाज भी उन्होंने कमरे में ही पढ़ी।
दोपहर तक कमरे से नहीं निकले
रईसुद्दीन ने फोन पर बताया कि रात घटना के बाद वह कमरे में ही रहे। शनिवार को दोपहर तक वह कमरे से नहीं निकले। दोपहर में उन्होंने निशा का उपचार कराया। उन्हें अभी भी दहशत बनी हुई है।
खबर सुनते ही अम्मी रोने लगी
यामीन ने बताया कि उन्होंने रात में अम्मी सद्दीकन को कुछ नहीं बताया। उन्हें शनिवार सुबह होने पर घटना की जानकारी दी और कहा कि अब सभी सुरक्षित हैं। लेकिन उन्होंने उनकी बात पर तब तक यकीन नहीं किया जब तब उन्होंने फोन से दोनों से बात नहीं कर ली।