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अभाविप ने स्कूल के खिलाफ मोर्चा खोला

Sun, 04 Sep 2016 01:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
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स्कूल में प्रधानाचार्य से वार्ता करते छात्रा अनिका के परिजन। - फोटो : amar ujala
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बागपत के बड़ौत में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने तहसील पहुंचकर स्कूल में छात्रों की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाने को लेकर बागपत के क्रिस्तु ज्योति कान्वेंट स्कूल के खिलाफ एसडीएम को ज्ञापन देकर कार्रवाई करने की मांग की।
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  परिषद के जिला संयोजक अंकुर ठाकुर के नेतृत्व में कार्यकर्ता तहसील पहुंचे और प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा बागपत के क्रिस्तु ज्योति कान्वेंट स्कूल में छात्रों की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाई जा रही है। स्कूल में हिंदू धर्म में पवित्र माने जाने वाला कलावा और राखी और बच्चों के हाथों से उतरवाया जा रहा है। इंकार करने पर उनसे मारपीट और धमकाया जा रहा है। इससे उनका धार्मिक और मानसिक शेाषण हो रहा है। बाद में उन्होंने एसडीएम को ज्ञापन देकर स्कूल प्रबंधन के विरुद्ध शीघ्र कार्रवाई की मांग की और इस प्रकार की गतिविधि आगे न हो इस पर भी रोक लगाने की मांग की। ज्ञापन देने वालों में अक्षय चौहान, शिवकुमार, राठी, कृष्ण शर्मा, अमन गुप्ता, अर्जुन सिंह, हैप्पी शर्मा, सागर आदि रहे।
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  कलावा, राखी बांधने से ऐतराज नहीं : प्रधानाचार्या 
बागपत। किस्तु ज्योति कॉवेंट हाईस्कूल में छात्रा के हाथ से कलावा काटने के मामले में विराम लग गया है। स्कूल की प्रधानाचार्या सिस्टर मर्सी ने कहा स्कूल में छात्र-छात्राओं के कलावा, राखी बांधने से किसी को कोई ऐतराज नहीं है। छात्रा का कलावा गंदा हो रहा था, इसलिए उसे खुलवाया गया था। 
   बागपत के सर्राफा बाजार में रहने वाले अजय ठाकुर की बेटी अनिका, स्कूल में कक्षा 5 में पढ़ती है। उसके एक हाथ पर कलावा बंधा हुआ था। स्कूल की एक शिक्षिका ने उसका कलावा कैची से काट दिया था। इस संबंध में उसके परिवार के लोगों को तरह-तरह की बाते कहीं थी। इसके अलावा भी कई छात्र-छात्राओं के हाथों से कलावा और राखी खुलवाई गई थी। पता चलते ही छात्रा के परिजन टेंशन में आ गए थे। शनिवार को छात्रा के परिजन स्कूल में पहुंचे। इस दौरान वहां पर कई मीडियाकर्मी भी पहुंच गए। प्रधानाचार्या और छात्रा के परिजनों की लंबी वार्ता हुई। बाद में प्रधानाचार्या सिस्टर मर्सी ने कहा है कि छात्रा के हाथ का कलावा गंदा हो रहा था। इसलिए उसे खुलवाया गया था। उन्हें कलावा-राखी बांधने से कोई ऐतराज नहीं है। 
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