फोटो संख्या 3
बड़ौत। जैनाचार्य विशुद्ध सागर ने कहा कि व्यक्ति जन्म से महान नहीं होता, अपितु सुखद कार्यों से व्यक्ति महानता को प्राप्त करता है।
जैनाचार्य बृहस्पतिवार को शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जैनाचार्यों ने विश्व वसुधा को विशिष्ट विचार आचार, अध्यात्म के साथ-साथ विशाल दृष्टि भी प्रदान की है। जहां जगत के सोच का अंत हो जाता है, उससे भी अधिक आगे से जैनाचार्यों का विराट सोच प्रारम्भ होता है। जिन शासन के दिगम्बर मुनि जन-जन में सत्य अहिंसा, सत्य, सदाचरण का सद्बोध देते हैं। जैन दर्शन ने विश्व संस्कृति को साहित्य एवं पुरातत्व का विपुल भण्डार दिया है। व्यसन मुक्त, सदाचरण सहित नागरिक ही विश्व शांति के प्रतीक हैं। जैन दर्शन ने हमेशा से सदाचरण, उच्च विचार, दया, करुणा, परस्पर सहयोग का ही पक्ष लिया है। जियो और जीनो दो यह जैन दर्शन का सूत्र है। सभा का संचालन पंडित श्रेयांस जैन ने किया। सभा में सुनील जैन, नवीन बब्बल, दीपक जैन, सतीश जैन, विनोद एडवोकेट उपस्थित रहे।