छपरौली 26 अगस्त
रठौड़ा गांव में हुए दोहरे हत्याकांड में मोनू का जब से मनीष उर्फ अन्ना से विवाद हुआ था तब से ही उसे अपनी जान का खतरा था और वह यह जानता था कि मनीष अपराधी प्रवृत्ति का है उसे छोड़ेगा नहीं इसके लिए वह मोहम्मदपुर स्थित अपनी बहन की ससुराल में रहकर ही पढ़ाई करने लगा और दिल्ली में कोचिंग भी करता था। मोनू घटना से तीन दिन पूर्व ही रठौड़ा आया था । दुर्भाग्य से यह कहा जा सकता है कि यहां पर उसकी मौत ही उसे खींच लाई। उधर, यह भी चर्चा है कि मनीष की जमानत 15 अगस्त के आसपास हुई थी और वह मोनू की हत्या करने की साजिश में लगा रहा जैसे ही उसे मोनू के आने की सूचना मिली तो उसने इस घटनाक्र म को अंजाम दे दिया। घटना में मुकेश की हत्या क्यों की गई यह अभी पुलिस के लिए भी चुनौती बना हुआ है वो इसलिए कि मनीष की दुश्मनी तो केवल मोनू के साथ थी। मुकेश की मौत के बाद परिजनों व बच्चों के लिए परेशानी यह बन गई कि मुकेश की मां सुरेशवती खाना बनाने की स्थिति में नहीं है उसे आंखें ठीक से काम नहीं करती इसलिए मुकेश ही सभी के लिए खाना बनाकर खिलाता था।
एक साथ दो अर्थी पहली बार हुई
छपरौली 26 अगस्त
गांव मे ऐसा पहली बार हुआ है कि एक बार एक घर से दो अर्थियां एक साथ उठी और उनका अंतिम संस्कार एक साथ किया गया। गांव के 75 वर्षीय वृद्ध उदयबीर, जयपाल, रामफल व तेजपाल आदि ने बताया इससे पहले भी गांव में कई दोहरे हत्याकांड हुए लेकिन उनका अंतिम संस्कार एक साथ नहीं हुआ। अपने बुजुर्गो के बताए अनुसार ये कहते है कि सैकडो वर्ष पूर्व हुई कार्तिक की बीमारी में भी एक दिन में गांव में कई मौते हुई लेकिन एक साथ दो अर्थी किसी भी घर से नहीं उठी। ऐसा होता था कि एक का अंतिम संस्कार करके आए तो दूसरे की मौत हो गई उसके बाद उसे लेकर अंतिम संस्कार के लिए लेकर चले। इस हत्याकांड में मारे गए दोनो भाईयों की अर्थियां जब एक साथ घर से निकली तो सब की आंखे आंसू से भरी थी और हर कोई इस जघन्य कार्य करने वालों को कोस रहा था। हजारों लोगों ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी।