बागपत। मौसम के अनुसार फसलों की सिंचाई, कीट और रोगों से बचाव किस प्रकार कर सकते हैं। इसकी जानकारी मौसम आधारित राज्य स्तरीय कृषि परामर्श समूह ने दी। गन्ना, गेहूं और अन्य फसलों के ज्यादा पैदावार के बारे में भी बताया। वैज्ञानिक विधि से कृषि करने के तरीके बताए।
जिला कृषि अधिकारी डॉ. सूर्य प्रताप सिंह ने बताया कि मौसम आधारित राज्य स्तरीय कृषि परामर्श समूह बनाया। इसके माध्यम से किसानों को अधिक फसल उत्पादन मौसम के अनुसार करने के बारे में बताया जाता है। जैसा मौसम होता है, उसी प्रकार की फसल उत्पादन किसान करें तो लाभ में रहेगा। परामर्श समूह के अनुसार गेहूं की बुआई के 18-20 दिन बाद हल्की सिंचाई जरूरी की जानी चाहिए। ऊसर भूमि में पहली सिंचाई हल्की करने से फायदा मिलेगा। जंगली जई फसल को प्रभावित करती है। इनसे बचाव के लिए दवा का छिड़काव करें। चने में प्रथम सिंचाई आवश्यकतानुसार फूल आने से पहले करें। कटुआ कीट से सुरक्षा करें। मटर में फूल आने के समय आवश्यकतानुसार एक सिंचाई करें। मटर में दाना बनते समय दूसरी सिंचाई करें। सरसों में चित्रित बग, पत्ती सुरंग कीट नुकसान पहुंचता है। दवा के छिड़काव से रोग से कीट से मुक्ति मिलेगी। आलू को झुलसा रोग से नियंत्रण के लिए 10-15 दिन के अंतराल पर दवा का छिड़काव करें। बागवानी में आम की फसल में मिलीबग रोग से बचाव के लिए चारों ओर गहरी जुताई करें, उसके बाद दवा का छिड़ाव करें। कृषि अधिकारी ने बताया कि गन्ने की कटाई जमीन के बराबर से करें। अंत फसलों में आवश्यकतानुसार सिंचाई के बाद उर्वरक का प्रयोग करें। सर्दी में पेड़ी में कम फुटाव होता है।