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नाविक रिजवान समेत सहित के खिलाफ चार्जशीट

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बागपत। काठा गांव में छह माह पहले हुए नाव हादसे के मामले में पुलिस ने नाविक सहित तीन आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। इस मामले में नाविक को पुलिस ने गिरफ्तार किया , जबकि दो आरोपियों ने एक माह पहले कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया । तीनों को जमानत मिल गई ।
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14 सितंबर 2017 को काठा गांव में यमुना नदी को नाव से पार करते डूबने से 19 लोगों की मौत हो गई । यह मामला लखनऊ तक गूंजा । इस मामले में पुलिस ने नाविक रिजवान को गिरफ्तार किया। विवेचना एसआई सरदार सिंह ने की। पुलिस विवेचना में सोनू और मोनू पुत्र इंद्र निवासी मवी कलां के नाम प्रकाश में आए । दोनों भाई बिना ठेके के यमुना नदी में नाव चलवा रहे थे। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार करने का प्रयास किया, लेकिन वे हाथ नहीं लगे। एक माह पहले दोनों भाई सोनू और मोनू न्यायालय में आत्मसमर्पण कर जेल चले गए और कुछ दिन बाद ही जमानत पर बाहर आ गए। इस मामले में पुलिस ने 110 लोगों की गवाही दर्ज की। पुलिस ने इसमें तीनों आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में 50 पेज का आरोप पत्र दाखिल किया है। तीनों आरोपियों को जमानत मिल चुकी है।


हादसे में इन लोगों की गई थी जान
काठा गांव के इलियास, रामपाल (52) पुत्र हरनारायण , मनीष (42) पुत्र राम पाल, तेजपाल (45) पुत्र दरियाव सिंह, अनिल (20) बालेश्वर, श्यामवीर (32) जोगेंद्र सिंह, सुनील (किसान का नौकर), नजीरन (55) पत्नी मंगते, रज्जो (42) पत्नी बरसे, जुबैदा (55) पत्नी अल्लाह बंदा, संतरा (53) पत्नी ओमवीर, मोनी (17) पुत्री श्रीभगवान, रेखा (35) सुमेंद्र सिंह, सविता (19) रतन सिंह, रामबीरी (28) जसवंत, सोहनवीरी (55) बालीराम, काजल (16) पुत्र सोहनवीर, शमां (20) पुत्री मौसम और मोहसिना (20) पुत्री इलियास था।
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इनकी बच गई थी जान
बागपत। काठा गांव की खूनी नाव मे सुमन (45) पत्नी दीपक, खातून (48) पत्नी शमशाद, फूलमती (40) पत्नी रोशन लाल, मंजू (35) पत्नी बिंदर, कमला (45) रामपाल, शिमला (40) पत्नी राजवीर, मीरा (35) श्री भगवान, बबली (42) पत्नी वीर सैन, संयोगिता (40) पत्नी रामबीर, नीरज (25) पुत्र मनोज, ममता (40) पत्नी नरेंद्र शामिल थे।


क्या था मामला
बागपत। काठा गांव के किसानों की हजारों बीघा जमीन यमुना नदी के पार है। किसान और मजदूर रोजाना की तरह नाव में सवार होकर 14 सितंबर को यमुना नदी पार करने के लिए चले थे। नाव में करीब 44 लोग सवार हो गए, इस कारण नाव यमुना में धंस गई और 19 लोगों की मौत हो गई। हादसे से नाराज ग्रामीणों ने लाशें हाईवे पर रखकर जाम लगाया। सरकारी वाहनों में आग लगा दी गई थी। पुलिस ने किसी तरह समझाकर मामला शांत कराया।


कई परिवारों को नहीं मिला मुआवजा
बागपत। अभी तक कई परिवार ऐसे हैं, जिनका कहना है कि उन्हें घोषणा के अनुसार मुआवजा नहीं दिया गया। कई बार डीएम से भी मिल चुके हैं। प्रकरण में सियासत भी तेज रही।
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