बागपत। एक बार फिर साबित हुआ पढ़ने लिखने की कोई उम्र नहीं होती। दिल्ली के नरेला के रहने वाले 63 साल के डॉ. सुखबीर सिंह ने एसपीआरसी डिग्री कॉलेज में एलएलबी की परीक्षा दी। वह कहते हैं कि संविधान को जानने की चाह के चलते कानून की पढ़ाई शुरू की है। इसके अलावा बुढ़ापे में इसे रोजगार का साधन भी बनाया जा सकता है।
दिल्ली के नरेला निवासी डॉ. सुखबीर सिंह मंगलवार को देहाती वेशभूषा और पगड़ी पहने एसपीआरसी डिग्री कॉलेज में परीक्षा देने पहुंचे। युवाओं के बीच वह आकर्षण का केंद्र बने रहे। वह बताते हैं कि दिल्ली यूनिवर्सिटी वे वर्ष 1976 में स्नातक किया । भारतीय संस्कृति के प्रति प्रेम जगा तो देहाती वेशभूषा पहनने लगा। परिवार तंबाकू की दुकान के भरोसे चलाते हैं। उन्हें आयुर्वेदिक दवा का ज्ञान है, इस वजह से बिहार के मुजफ्फरपुर से बीएएमस की पढ़ाई की। पिछले दिनों पारिवारिक कारणों से कचहरी आना जाना हुआ। वह कहते हैं कि यहीं से कानून को जानने की चाह पैदा हुई। जगमोहन कॉलेज ऑफ लॉ मसूरी में दाखिला लिया। इस कॉलेज का परीक्षा केंद्र बनाया है एसपीआरसी डिग्री कॉलेज को। वह कहते हैं कि पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती। सिर्फ आपका लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए। वह कहते हैं कि अधिकतर पढ़ाई यू-ट्यूब पर ऑनलाइन लेक्चर के जरिये ही पूरी की है। युवाओं से आह्वान किया कि वह लक्ष्य हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करें और तकनीकी का प्रयोग करें।
50 की उम्र पार करने वाले कई पहुंचे
बागपत। एसपीआरसी डिग्री कॉलेज में एलएलबी की परीक्षा देने के लिए 50 की उम्र पार कर चुके कई अभ्यर्थी पहुंचे। एयरफोर्स से सेवानिवृत्त सुरेंद्र सिंह कहते हैं कि बस पढ़ने की इच्छा थी, इसलिए इस बार एलएलबी करने का विचार आया और पढ़ाई शुरू कर दी।