फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चौगामा की 85 हजार हेक्टेयर जमीन प्यासी

Mon, 12 Dec 2016 12:22 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
विज्ञापन
गिरता जलस्तर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
बागपत के दोघट के चौगामा क्षेत्र में गिरते जल स्तर को रोकने और खेतों में सिंचाई के लिए 15 सितंबर 1977 में हिंडन-कृष्णा दोआब खरीब नहर परियोजना (चौगामा नहर) का प्रारंभ तत्कालीन सिंचाई मंत्री ठाकुर बलबीर सिंह ने बुढ़ाना में किया था।
विज्ञापन


उस समय हिंडन और कृष्णा नदी में लिफ्ट सिस्टम से इस नहर में पानी डालने की व्यवस्था की थी। जो बाद में 1985 में तत्कालीन सिंचाई मंत्री वीर बहादुर सिंह ने ग्राम दाहा में इस परियोजना को बदलकर सहारनपुर के कल्लरपुर रजवाहे से 102 किमी लंबी नहर बनाकर इसमें पानी डालने की व्यवस्था की घोषणा की।

आज तक भी यह नहर पूरी नहीं हुई और चौगामा की 85 हजार हेक्टेयर भूमि आज भी प्यासी है। चौगामा नहर की टीकरी, निरपुड़ा और कुरथल तीन शाखा एवं मिलाना, भड़ल, गैडबरा, दोघट, भगवानपुर, सूजती छह माइनर हैं। अब तक इस पर 100 करोड़ रुपये से भी ज्यादा खर्च हो चुका है।
विज्ञापन


जबकि 1977 में जब इसका निर्माण प्रारंभ हुआ था, उस समय इस पर 8.62 करोड़ रुपये खर्च होने का प्राविधान था। अधिकांश ग्रामीणों के अनुसार 1993 में पूर्व केंद्रीय मंत्री अजित सिंह ने इस परियोजना को केंद्रीय जल आयोग से स्वीकृति दिलाई और केंद्रीय जल आयोग ने 39 करोड़ रुपये इसके निर्माण के लिए उप्र सिंचाई विभाग को दिए थे।

वह धनराशि भी खर्च हो चुकी है और इसके अलावा उप्र जल निगम ने भी इस पर 50 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च कर चुके हैं। जिस उद्देश्य के लिए इसका निर्माण किया जा रहा था, उसकी पूर्ति आज तक भी नहीं हुई। इसमें आज तक भी पानी नहीं आया।

इस नहर का निर्माण केवल खरीब फसल की सिंचाई करने के लिए किया जा रहा है, जो एक जुलाई से 10 अक्तूबर तक चलाने का प्राविधान है। जबकि क्षेत्र के लोगों की मांग है कि इसे नियमित नहर बनाई जाए और इसमें गूल बनाकर किसानों के खेतों की सिंचाई की जाए। 
विज्ञापन

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें