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रोजा अपने आप में मुकम्मल इबादत : मौलाना मोमिन

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अग्रवाल मंडी टटीरी (बागपत)। मौलाना मोमिन ने कहा कि रोजा अपने आप में एक मुकम्मल इबादत है। रोजे के मायने है रुकना यानी भूख, प्यास को दर किनार कर अल्लाह की याद में खो जाना है। रोजा जिस्मानी और रुहानी दोनों तरह की इबादत का जरिया है। यह एक ऐसी छिपी हुई इबादत है, जिसका दिखावा नहीं होता। तकरीर में कहा कि रोजे में जुबान को बुरी बात, हाथों को गलत काम, बुराई की तरफ बढ़ने से रोकता है। इन बातों पर अमल करना ही रोजा है। अब दूसरा अशरा चल रहा है। इसमें रोजे रखकर अल्लाह से अपनी मगफिरत करना लेनी चाहिए।
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