बावली चौक स्थित आर्य समाज भवन में आर्य समाज पट्टी चौधरान के तत्वावधान में यज्ञ का आयोजन किया। इसमें सैकड़ों लोगों ने आहुति देकर राष्ट्र के कल्याण की कामना की।
यज्ञ में डॉ. हरपाल सिंह ने कहा कि आत्मा को वाणी के द्वारा प्राप्त नहीं किया जा सकता, न मन में और न ही आंख से। यदि अनुमान द्वारा मान लिया जाए कि शरीर में आत्मा है तो मात्र सामान्य ज्ञान होगा। धुएं को देखकर अग्नि का ज्ञान होता है, किंतु किसी की अग्नि तिनकों की, लकड़ी की, कोयले की आदि-आदि का यह ज्ञान तो नहीं होता। यह ज्ञान तभी होता है, जब हम धुएं के पास जाकर सत्य को देखते हैं। इसी प्रकार मनुष्य ईश्वर की कृपा से ही निष्काम कर्म पाता है। भगवान स्वभाव से दयालु हैं। यह सृष्टि उसकी कृपा का सबसे बड़ा प्रमाण है। उसकी कृपा प्राप्त करने के लिए अपनी आत्मा व अंत करण को उनकी ओर प्रवृत्त करों तो वह कृपालु अपने अनंत भक्तिशाली हाथों से उसी प्रेमी को उठाकर अपनी गोद में बैठा लेता है। यज्ञ के ब्रह्म समर भानु आचार्य और यज्ञमान डॉ. हरपाल रहे। इसमें डॉ. ओमवीर सिंह आर्य, हरबीर सिंह आर्य, प्रीतम सिंह आर्य, यतेंद्र तोमर, श्यौराज सभासद, नरेंद्र सिंह, बिजेंद्र, महावीर सिंह, ओमप्रकाश, अंग्रिस मुनि, माया देवी, उर्मिला चौधरी आदि रहे।
यज्ञ का आयोजन
बड़ौत। रेलवे रोड पर स्थित आर्य समाज भवन में भी यज्ञ का आयोजन किया। यज्ञ के यज्ञमान विनोद भारद्वाज रहे। इस मौके पर आचार्य समर भानु ने कहा कि घर में आपसी मेल मिलाप प्रेम से रहने का लक्ष्मी का वास माना जाता है। अत: पत्नी-पति के प्रति प्रीती वाली हो और पति सदैव मधुर वाणी बोले। पति-पत्नी यह दृढ़ निश्चय करें कि उनके घर में अलक्ष्मी व दुष्ट प्रवृत्ति का निवास नहीं होगा। इसमें प्रीतम सिंह वर्मा, हरबीर सिंह, जसवीर मलिक, हरपाल सिंह, रामबली राणा, सत्यपाल पथौलिया, अर्चित कुमार, राजेंद्र कुमार, रणतेज सिंह सुरेंद्र पाल आदि रहे।