बागपत। सियासत में खूब पालाबदल हुई। बागपत से लखनऊ और दिल्ली तक राजनीतिक पारा इस साल गरम रहा। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन करने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचे। यहीं से उन्होंने पूरे पश्चिम उत्तर प्रदेश को साधने की कोशिश की। कैराना उपचुनाव से पहले सियासी गलियों में पीएम के दौरे के राजनीतिक अर्थ निकाले गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस साल चार बार बागपत आए। किसानों को साधने की खूब कवायद की गई। केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, केंद्रीय राज्यमंत्री गिरिराज सिंह समेत केंद्र और प्रदेश सरकार के नेताओं का आना-जाना लगा रहा। भाजपा ने लोकसभा चुनाव की तैयारियों को देखते हुए कई चाल बदली। जिलाध्यक्ष संजय खोखर को हटाकर वेदपाल उपाध्याय को जिम्मेदारी दी। लोकसभा प्रभारी और जिला प्रभारी बदल दिए गए। कई अभियान चलाए गए।
छपरौली गई तो खाली हो गया रालोद का खाता
बागपत। राज्यसभा चुनाव में बसपा उम्मीदवार की हार के बाद रालोद अध्यक्ष अजित सिंह ने छपरौली विधायक सहेंद्र सिंह रमाला को पार्टी से हटा दिया। इसके बाद सहेंद्र सिंह ने भाजपा ज्वाइन कर ली। इस तरह रालोद का विधानसभा में खाता जीरो हो गया।
बजरंगी की हत्या के बाद बसपा से निकाले दीक्षित
बागपत। बड़ौत के पूर्व बसपा विधायक लोकेश दीक्षित को बसपा से निष्कासित कर दिया गया। बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद यह कदम उठाया गया। बजरंगी ने दीक्षित और उनके भाई से रंगदारी मांगी थी।
जम्मू पहुंच गए सत्यपाल मलिक
बागपत। बागपत के हिसावदा गांव के रहने वाले सत्यपाल मलिक को बिहार का राज्यपाल बनाया गया था। इस साल उन्हें बिहार से जम्मू-कश्मीर भेजा गया। लेकिन घाटी में बदले सियासी माहौल के बाद वह अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहे। प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक भी इस साल खेकड़ा में आए थे।
जयंत बागपत से लड़ेंगे चुनाव
बागपत। इसी साल लगभग तय हुआ कि रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी इस बार बागपत से चुनाव लड़ेंगे। हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई, लेकिन रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह की मुजफ्फरनगर में बढ़ती सक्रियता से सियासी गलियों में यही अंदाजा लगाया जा रहा है।