बड़ौत (बागपत)।
जहां आज देशभर में 72वां स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मनाया जाएगा, वहीं आजादी का जिक्र होते ही बुजुर्ग स्वतंत्रता सेनानियों की आंखें चमक उठती है। अंग्रेजों द्वारा बच्चों व महिलाओं पर किए जाने वाले जुर्म आज भी उनके दिमाग मेें है। वे कहते है कि जब देश मेें आजादी का आंदोलन शुरू हो गया था, तभी अंग्रेज बच्चों से देश विरोधी नारे लगवाकर क्रांतिकारियों की कमर तोड़ने का काम करते थे, लेकिन इसके बावजूद भी क्रांतिकारियों ने हार नहीं मानी और अपने प्राणों का बलिदान देेकर देश को आजादी दिलाई।
बावली गांव के इलम सिंह और हरिपाल सिंह स्वतंत्रता सेनानी है, उन्हें आज भी गुलामी के दिन याद है, इसलिए आजादी के दिन का महत्व भी जानते है। खुशी की वह आजादी सुबह 72 साल पहले आई। उम्र के आखिर पड़ाव पर पहुंच चुके बावली गांव के स्वतंत्रता सेनानी इलम सिंह पुरानी यादों मेें खोकर बताते है कि तब सब एकजुट थे, जाति बिरादरी की बातें नहीं होती थी, समाज एकजुट था। फौज एकजुट थी, बलिदान दिएं, इसलिए आजादी मिल गई, लेकिन देश को आजाद हो गया, लेकिन आज देश मेें अनेकों समस्याएं हैं। नई पीढ़ी के सामने रोजगार संकट है। महंगाई बढ़ गयी है। उच्च शिक्षा हासिल करना अब आसान नहीं रहा है।
बावली गांव के ही दूसरे स्वतंत्रता सेनानी हरिपाल बताते हैं कि वह आजाद हिंद फौज में थे। देश के लिए नेताजी सुभाष चंद बोस के नेतृत्व में लड़ाई लड़ी। कहा कि हमारी आंखों के सामने युवाओं ने आजादी के लिए अपना बलिदान दिया। वह खुद भी घायल हुए। उनकी नश नश में देशभक्ति थी। बताया कि जब देश मेें आजादी का आंदोलन शुरू हो गया था, तभी अंग्रेज महिलाओं व बच्चों पर सितम ढाना शुरू कर दिया था। बच्चों से देश विरोधी नारे लगवाएं जाते थे। उन्होंने कहा कि हमें आजादी में हुए बलिदानों को नहीं भूलना चाहिए। आज हम आजाद है इसलिए देश व राष्ट्र हित में काम करें। सभी प्यार से रहे।
निजी स्वार्थ में भूल गए देश
बड़ौत। आज देश तो आजाद हो गया है, लेकिन लोगों मेें निजी स्वार्थ की भावना लगातार बढ़ती जा रही है। किसी को भी देश की चिंता नहीं है। 15 अगस्त और 26 जनवरी के अवसरों पर मात्र तिरंगा लगाकर फेस बुक व व्हाटएप पर फोटो डालकर लोग वाही वाह बटोर रहे हैं। युवा नशे का आदी बन चुका है, किसी को देश की चिंता नहीं है। आजादी के लिए बलिदान देने वाले क्रांतिकारी कौन कौन थे, हमारे युवाओं का इतना भी नहीं पता। - युवा गौरव मलिक।
भ्रष्टाचार बढ़ने से बिगड़ रहा माहौल
बड़ौत। आज देश तो आजाद हो गया है लेकिन देश आजाद होते हुए भी गुलाम हो गया है। महंगाई व भ्रष्टाचार ने देश को फिर से गुलाम बना दिया है। महंगाई के चलते भूख मरी बढ़ गयी है, लोग एक-दूसरे को मारने से भी नहीं कतराते हैं। भ्रष्टाचार के चलते देश में विकास का पहिया थम गया है। इन सब का कारण एकता नहीं है। हम सभी को संकल्प लेना होगा तभी देश मेें खुशहाली बनी रहेगी। युवा - सुमित तोमर