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किसान नहीं संभले तो बंजर हो जाएगी जमीन

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बागपत। रासायनिक खादों का अधिक प्रयोग धरती को बंजर बना रहा है। भूमि की उर्वरा शक्ति कम हो रही है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि संतुलित खाद का प्रयोग किया जाना चाहिए। समय-समय पर मिट्टी की जांच भी कराई जानी चाहिए।
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जिले में कुल कृषि रकबा करीब एक लाख पांच हेक्टेयर है। किसान बेहतर उत्पादन के लिए रासायनिक खादों का प्रयोग कर रहे हैं। इसका विपरीत असर भूमि की उर्वरा शक्ति पर पड़ा रहा है। रासायनिक खाद के अधिक प्रयोग से भूमि में फास्फोरस, पोटाश, जिंक, सल्फेट तत्वों की भारी कमी आ गई है। इसके अलावा नाइट्रोजन का स्तर भी गिरता जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र खेकड़ा के प्रभारी डॉ गजेंद्र सिंह का कहना है कि हालात यही रहे तो और भी कई जीवांशों का स्तर गिर जाएगा। किसानों को संतुलित खाद का प्रयोग करना चाहिए और समय-समय पर मिट्टी की जांच जरूर कराएं।

गोबर का खाद करें प्रयोग
बागपत। यदि भूमि की उर्वरा शक्ति बरकरार रखना है तो किसानों को रसायनिक खादों के बजाय हरी खाद, कंपोस्ट, वर्मी और गोबर की खाद का प्रयोग करना होगा। इसके अलावा वर्ष में एक बार दलहनी फसलों की भी बुवाई करनी होगी। दलहनी फसलों में मटर, मसूर, चना और अरहर आदि कई फसल शामिल है।
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खत्म हुआ केंचुआ
बागपत। कृषि वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों का कहना है कि भूमि में रसायनिक खादों का बडे असंतुलित ढंग से प्रयोग के कारण केंचुए लगभग समाप्त हो गए है। इसका सीधा असर भूमि की उर्वरा शक्ति पर पड़ा है।

35 फीसदी तक घटी उर्वरा शक्ति
बागपत। भूमि संरक्षण अधिकारी डॉ. संतराम का कहना है कि किसानों की अदूरदर्शिता के चलते उर्वरा शक्ति घट रही है। पिछले कई वर्षों के आंकड़ों पर यदि नजर डाली जाए तो वह 30 से 35 फीसदी घट चुकी है। उन्होंने साफ कह दिया है कि यदि किसान जल्द सावधानी नहीं बरतेगा तो भविष्य में नुकसान उठाना पड़ेगा।
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