बड़ौत (बागपत)।
जैन संत अरुण मुनि ने कहा भाव पूर्वक प्रार्थना करने से विचार और वृतियां बदल जाती है और मानों में शांति हो जाती है।
वे मंगलवार को जैन स्थानक मंडी में धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा निष्पाय जीवन जिनका हैं, वे धन्य होते है। महापुरुष भी धन्य है। साधना का मुख्य लक्ष्य यहीं है कि हम निष्पाप बनें। बारहवां पाप होता है कि अगर हम श्रवण व श्रावक नहीं बन सकते तो कम से कम शांतचित्त वाले तो बन ही सकते है। कलह मुक्ति जीवन जीना चाहते है तो पहले शांत स्वभाव के बने। जब व्यक्ति का स्वभाव बदल जाता है तो कायाकल्प हो जाता है। कर्मकांड एक अलग क्रिया है और कायाकल्प होना अलग बात है। वह व्यक्ति ही उत्तम होता है जो तूफान में भी विचलित नहीं होता। जिनका जीवन कलेश से भरा होता है वे सत्य की खोज नहीं कर पाते। इसमें अमित राय जैन, श्रीकृष्ण जैन, अनुराग जैन, नीरज जैन, अनिल जै,न, हंस कुमार जैन, दीपक जैन, इंद्राणी, पूनम, कमलेश, गीता, सविता आदि