बागपत। जिले में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सपने जैसी हो गई है। प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की बात छोड़िए, इमरजेंसी तक का भरोसा नहीं रह गया है। सुविधाओं का ऐसा टोटा है कि हादसों और गनशॉट के घायलों को यहां से रेफर करने के अलावा कोई चारा नहीं है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से स्वास्थ्य विभाग लाचार है। मरहम-पट्टी करने तक ही इमरजेंसी सिमट गई लगती है। गंभीर घायल मरीज रेफर कर दिए जाते हैं, जिनमें कई मामले ऐसे भी हैं जिनकी हायर सेंटर पहुंचने से पहले ही मौत हो चुकी है। दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर दिल्ली के नजदीक होने के बावजूद यहां सुविधाएं नहीं होने से लोगों को परेशानियां झेल रहे हैं। सीएमएस डॉ. बीएलएस कुशवाहा का कहना है कि जो मरीज गंभीर बीमार होते हैं या हादसे में किसको ज्यादा चोट लगी रहती है, उनको अस्पताल से रेफर किया जाता है। विशेषज्ञ डॉक्टर की कमी के चलते ऐसा करना पड़ता है।
केस : 1
हादसे में घायल ब्रिजेश को लेकर परिजन जिला अस्पताल पहुंचे। जांच की गई तो हाथ टूटा होने की पुष्टि हुई। हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं होने के कारण ब्रिजेश को मेरठ मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर किया।
केस : 2
शहर निवासी किशोर को दिल्ली रोड पर कैटर ने टक्कर मार दी थी। गंभीर हालत में उसे परिजन जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं होने के कारण मेरठ रेफर किया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
यहां सीटी स्कैन तक नहीं होता
बागपत के जिला अस्पताल में सीटी स्कैन तक की सुविधा नहीं है, इसलिए चिकित्सकों को गंभीर मामला मिलते ही मरीजों को रेफर करने की मजबूरी से दो चार होना पड़ता है।
करोड़ों के महिला अस्पताल पर ताला
जिला अस्पताल के पास ही 100 बिस्तर का महिला अस्पताल बना हुआ है, जो करीब एक वर्ष पहले बनकर तैयार हो गया। चार माह पहले दो बार उद्घाटन हुआ। करीब एक माह चलकर ही बंद हो गया। वर्तमान में इस पर भी ताला लटका हुआ है। इसके ठेके पर संचालन की कवायद शुरू की गई, लेकिन अभी तक परवान नहीं चढ़ी है।