बागपत। जल्द ही प्रत्येक शहर, गांव और कस्बे में अस्थायी %गोवंश आश्रय स्थल’ खोलने का निर्णय शासन ने लिया है। प्रशासन की ओर से ही उनके भरण पोषण का खर्च वहन किया जाएगा। मुख्य सचिव डॉ. अनूप चंद्र पांडेय ने इसके लिए आदेश भी जारी कर दिए हैं।
जिले में आवारा गोवंश किसानों की खून पसीने के कमाई को चट कर रहे हैं। आवारा पशु गेहूं की फसल से लेकर ईख, सरसों, जई, ज्वार सहित अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। सड़क हादसों का भी कारण बन रहे हैं। सैकड़ों लोग चोटिल हो गए हैं और कई की जाने जा चुकी है। लगातार किसान गोवंश से निजात दिलाने की मांग कर रहे हैं। सरकार ने इनसे निजात दिलाने के लिए जिले के प्रत्येक शहर, गांव और कस्बे में अस्थायी %गोवंश आश्रय स्थल’ खोलने का निर्णय लिया है। इससे कृषकों को आवारा पशुओं से निजात मिलेगी। मुख्य सचिव डॉ. अनूप चंद्र पांडेय ने इसके लिए आदेश जारी किए है। संचालित नीति और उद्देश्य से अवगत कराया गया है। उन्होंने बताया कि निराश्रित पशुओं के संरक्षण एवं भरण पोषण की जिम्मेदारी स्थानीय निकाय की होगी। आश्रय स्थल की स्थापना, व्यवस्था एवं प्रबंधन, संचालन स्थानीय निकाय, ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत, नगर पंचायत, नगर पालिका द्वारा की जाएगी। सामाजिक संस्थाओं से भी इसमें सहयोग लिया जाएगा। मुख्य सचिव ने डीएम, एसपी, पशु चिकित्सा विभाग, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, डीपीआरओ, सभी नगर पालिका और पंचायत के ईओ को डीएम के माध्यम से आदेश जारी किया जाएगा।
निर्विवादित भूमि का कराया जाएगा चयन
बागपत। गाम पंचायत, नगर निकाय, निराश्रित, बेसहारा गोवंश हेतु अस्थायी आश्रय स्थल बनाने योग्य निर्विवादित भूमि जिसमें चारागाह, गोचर की भूमि भी शामिल है, उपलब्ध कराना है। सिंचाई मत्स्य, उद्यान, कृषि, गन्ना विकास सहयोगी विभागों में भूमि यदि ग्राम स्तर पर उपलब्ध है तो उसे चिन्हांकित किया जाएगा।
नीति का उद्देश्य
बागपत। निराश्रित, बेसहारा गोवंश को आश्रय उपलब्ध कराना, आश्रय स्थल पर रखे गए गोवंश हेतु भरण पोषण की व्यवस्था, संरक्षित माता गोवंश को प्रजनन सुविधा उपलब्ध कराना, गोवंश से उत्पादित दूध, गोबर, कंपोस्ट के विक्रय व्यवस्था से आश्रय स्थल को वित्तीय रूप से स्वावलंबी बनाकर जनमानस को निराश्रित ओर बेसहारा गोवंश की समस्या से छुटकारा दिलाना है।
गोवंश आश्रय स्थल पर होने वाले कार्य
बागपत। ऊसर, बंजन भूमि को कृषि योग्य बनाना, भूमि समतलीकरण, जल संरक्षण कार्य के लिए तालाब का निर्माण, खाई निर्माण, आश्रय स्थलों पर पौधरोपण जल की व्यवस्था कराना, चारा उपलब्ध कराना, सौर ऊर्जा से प्रकाश की व्यवस्था, सुरक्षा और अन्य व्यवस्था, संरक्षित पशुओं की पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जाएगी।