बागपत। ककौर कलां गांव के जंगल में खटके में फंसे तेंदुए की वन विभाग की सुपुर्दगी में हुई मौत के मामले में बरेली से विसरा की जांच की रिपोर्ट मिल गई है। डीएफओ अनिल कुमार मिश्र का कहना है कि रिपोर्ट मिल गई है। विवेचना में शामिल कर लिया गया है। प्रकरण की तह तक पहुंचने के लिए एक्सपर्ट की राय भी ली जाएगी, ताकि किसी तरह की चूक मामले में न हो जाए।
छपरौली के ककौर कलां में तेंदुए की मौत को मुख्य वन संरक्षक पश्चिमी क्षेत्र ललित कुमार वर्मा ने गंभीरता से लिया । पुलिस की जांच के अलावा विभागीय जांच डीएफओ बागपत को सौंपी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि लाठियों से गले पर अधिक दबाव पड़ने से तेंदुए की सांस नली फट गई थी। यही नहीं खटके में फंसे पंजे का नाखून टूटा मिला, यह पंजा चोटिल था। मुख्य वन संरक्षक पश्चिमी क्षेत्र के आदेश पर विसरा प्रिजर्व किया, इसकी जांच इंडियन वेटेनेरी रिसर्च इंस्टीट्यूट बरेली में कराई गई। डीएफओ बागपत अनिल कुमार मिश्र ने पुष्टि की है कि विसरा रिपोर्ट मिल गई है, जिस पर वन विभाग एक्सपर्ट की राय लेगा। पुलिस को यह रिपोर्ट विवेचना में शामिल करने के लिए भेज दी है। प्रथम दृष्टया मौत की वजह श्वांस नली फटने से ही लग रही है।
क्या था मामला
बागपत। छपरौली के ककौर कलां गांव में शिकारी ने खटका लगाया था। इसमें तेंदुए का पैर फंस गया। मौके पर सैकड़ों लोग जमा हो गए। वन विभाग की अदूरदर्शिता के चलते तेंदुए की मौत हो गई। वनकर्मी तेंदुए की गर्दन को लाठी से दबाकर बैठ गए, जिससे तेंदुए की सांस नली फट गई थी। प्रकरण की जांच हुई, इसमें कई कर्मचारियों की लापरवाही सामने आ चुकी है।
जांच का नतीजा, ढाक के तीन पात
बागपत। पुलिस और वन विभाग की टीम अभी तक यह पता नहीं लगा सकी है कि शिकारी कौन था और किसके कहने पर खटका लगाया था। डीएफओ का कहना है कि पुलिस विवेचना कर रही है और शिकारी के विषय में पुलिस ही कुछ बता सकेगी। विभागीय जांच पूरी कर अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जा चुकी है।