बागपत। नाव हादसे के बाद काठा गांव में सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। अब तक की सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष का तर्क है कि जिस वक्त पुलिस ने बर्बरता दिखाई, उस वक्त भाजपा के दोनों विधायक और केंद्रीय मानव संसाधन, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनरोद्धार राज्य मंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह यमुना नदी के किनारे पर ही खड़े थे। काठा केस की दो जांच शुरू हुई है, पहली नाव हादसे की और दूसरी हाईवे पर बवाल की। पुलिस सेवा का लंबा अनुभव रखने वाले डॉ. सत्यपाल सिंह काठा प्रकरण पर बेबाकी से अपनी राय देते हैं। प्रस्तुत है उनसे हुई बातचीत के अंश....
सवाल : यमुना नदी में नाव समाने से काठा गांव के 19 लोगों की मौत हो गई। आप खुद मौके पर गए, किसकी गलती है।
जवाब: बेहद दुखद हादसा है। क्षमता से अधिक लोगों को नाव में बैठाने के कारण नाविक सीधे तौर पर ही जिम्मेदार है, लेकिन पुलिस-प्रशासन अपनी जवाबदेही से नहीं बच सकता। यदि बगैर नियम नाव चल रही थी तो पुलिस-प्रशासन ने इसकी कभी तक जांच और कार्रवाई क्यों नहीं की। सीएम योगी आदित्यनाथ से बातचीत कर वास्तविक स्थिति से अवगत कराया गया है। डीएम को निष्पक्ष जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
सवाल : हाईवे पर लाशें रख कर बैठे लोगों को क्या जबरन हटाने और बल प्रयोग करने का पुलिस का कदम सही था।
जवाब: पुलिस ने क्या कदम उठाया था, इसकी जांच होगी, लेकिन लाशों पर राजनीति करना गलत है। सीधी-साधी जनता को ऐसे लोगों की पहचान करनी चाहिए, जो उनकी आड़ में अपनी राजनीति चमकाते हैं। गम में डूबे लोगों को उकसाकर माहौल खराब कर देते हैं। हादसे के बाद कुछ लोग सिर्फ गांव के सीधे-साधे लोगों को उकसा रहे हैं।
सवाल: आपका पुलिस सेवा का इतना लंबा अनुभव रहा है, क्या पुलिस को हाईवे से पीड़ितों को हटाने में इतना उतावलापन दिखाना चाहिए था।
जवाब: ऐसे मामले बेहद संवेदनशील होते हैं। पुलिस को धैर्य से काम लेना चाहिए था। हादसे के बाद दुख स्वाभाविक है। काठा केस की सरकार निष्पक्ष जांच कराएगी। पुलिस की भूमिका क्या रही और भीड़ में ऐसे कौन लोग थे जो भोले ग्रामीणों को उकसा रहे थे, इन सब बिंदुओं पर डीएम को निष्पक्ष जांच के निर्देश गए गए हैं।
सवाल: ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध खनन भी हादसे की वजहों में से एक है।
जवाब: अवैध खनन रोकने लिए यूपी सरकार ने ठोस नीति बनाई है। ई-टेंडरिंग प्रक्रिया से ही अब ठेके छोड़े जा रहे हैं। जिस भी और जिसकी वजह से भी लोगों की जान गई, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। लोगों की सुरक्षा करना सरकार की प्राथमिकता है।