यमुना में डूबी शमा थी घर की खेवनहार
बागपत। काल बनी यमुना के सामने काठा बेबस हो गया। सालों तक यह हादसा टीस बनकर सीने में उभरता रहेगा। लेकिन एक परिवार ऐसा भी है जिसका सहारा हमेशा के लिए छिन गया। अपने घर की खेवनहार शमा यमुना के भंवर में फंसकर मौत का शिकार हुई। लेकिन इसके साथ ही उसका परिवार बेसहारा हो गया है। शमा अपने परिवार के लिए बेटे की तरह थी। मजदूरी कर परिवार को पालना और बहनों को पढ़ाना उसका मकसद था। उसकी मौत से परिवार बेसहारा हो गया है।
काठा की शमा नाव हादसे में मौत का शिकार हो गई। उसके पिता मौसम ने बताया कि वह मजदूरी करके अपने परिवार का पालन पोषण करता है। उसकी पत्नी संजीदा के सात बेटी पैदा हुई थी। उनके कोई लड़का नहीं है। बेटियों में शमा सबसे बड़ी थी। परिवार की माली हालत होने के कारण शमा को कक्षा आठ में ही पढ़ाई छूट गई थी। शमा उनके साथ मजदूरी करती थी। उसका इरादा अपनी छोटी बहनों को शिक्षित बनाना था। उनकी पढ़ाई में उसने कोई कसर नहीं छोड़ी। उसकी बहन साइन और साईस्ता कक्षा 10, गुलिस्ता आठवीं, सना नौवीं, अक्षा छठीं और अक्षरा कक्षा चार में पढ़ती है। शमा सुबह को अपनी माता संजीदा के साथ खेत में मजदूरी करने के लिए जाती थी। इसी तरह बृहस्पतिवार को भी हरियाणा के किसान के खेत में काम करने के लिए जा रही थी। इसी दौरान नाव डूबने से उसकी मौत हो गई। उसकी मौत से पूरा परिवार टूट गया है। शमा का सपना अधूरा रह गया। साथ ही उसके पिता खुद को अकेला महसूस कर रहे हैं। कहते हैं कि बेटी उसकी सबसे बड़ी मददगार थी, ऊपर वाले के सामने कोई क्या करें।
संजीदा बोली, मैने बेटी को डूबते देखा
बागपत। शमा और उसकी माता संजीदा दोनो डूब गई थीं। संजीदा किसी तरह पानी से निकल गई थी। उसने अपनी बेटी को अपने आंखों के सामने डूबते हुए देखा था।
शादी की तैयारियां भी अटकीं
बागपत। अनिल के भाई मनोज की अगले माह शादी होनी है। परिवार के लोग शादी की तैयारियों में लगे हुए थे। अनिल की नाव डूबने से मौत होने से परिवार कहर टूट पड़ा। शादी की तैयारियों गम में बदल गई। इसी तरह युवती काजल की बहन मनु की अगले माह शादी होनी है। काजल की मौत होने से पूरा परिवार गम में डूबा गया।
रज्जो के पति की 15 साल पूर्व हो गई थी मौत
बागपत। नाव में डूबने से महिला राजो उर्फ रज्जो की मौत हुई है। उसके पति बरसे की 15 साल पूर्व मौत हो गई थी। इससे बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल हो रहा है।
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मासूम को छोड़कर चली गई श्यामवीरी
बागपत। श्यामवीरी अपने पति जोगेंद्र के साथ मिलकर मजदूरी करती थी। वह अपनी ढाई वर्षीय बेटी शगुन को छोड़कर खेतों में काम करने जा रही थी, लेकिन हादसे का शिकार हो गई। शगुन का भी रो-रोकर बुरा हाल है।
एक साल के अंदर दो बहनों की हो चुकी मौत
बागपत। रतनपाल की बेटी सविता की नाव डूबने से मौत हो गई। एक साल पूर्व भी उसकी दूसरी बेटी बबीता की बीमारी के चलते मौत हो गई थी। इससे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल हो रहा है।